डिजिटल हेल्थ कैसे हमारे भविष्य में क्रांति लाएगा?

वन पर्सन वन मेडिकल रिकॉर्ड
वन पर्सन वन मेडिकल रिकॉर्ड

अभी तक आपने दो प्रकार के हेल्थ केयर सिस्टम प्राइवेट हेल्थ केयर और पब्लिक हेल्थ केयर सिस्टम के बारे में जानते होंगे लेकिन अब आने वाले समय में डिजिटल हेल्थ भी कॉमन होगा। चूंकि हेल्थ एक बहुत ही पर्सनलाइज्ड मैटर है और हर एक इंडिविजुअल पर्सन के हिसाब से उसका अलग ट्रीटमेंट होता है इसलिए भविष्य में डिजिटल हेल्थ की मदद से हर एक इंसान का सटीक इलाज किया जाएगा।

मैं आपसे डिजिटल हेल्थ के बारे में बात कर रहा हूं और इसकी मदद से हेल्थकेयर कैसे बेहतर बनाया जाएगा और आने समय में कैसे इसकी मदद से मेडिकल ट्रीटमेंट में मदद मिलेगी ।

डिजिटल हेल्थ काम कैसे करेगा ?

सोचिए अगर आप डॉक्टर के पास जाते हैं और आप अपनी मेडिकल हिस्ट्री का आईडी उसे बताते हैं तो वह अपने कंप्यूटर में आपके तथा आपकी फैमिली की पूरी मेडिकल हिस्ट्री को देख सकेगा तथा आपकी डेली एक्टिविटी कैसी है, आपकी हार्टबीट नॉर्मल रही है या नहीं या फिर आपके बॉडी का टेंपरेचर कब ज्यादा रहा वह सभी चीजों को देख सकेगा।

वही आपकी मेडिकल हिस्ट्री से आपको कब कौन सी बीमारी हुई है और आपको उस समय किस दवा का कैसा प्रभाव हुआ तथा आपको बचपन में किस चीज की वैक्सीन लगी है यह सभी चीजें उसे पता चल जाएंगी। तो होगा यह कि इस डेटा की मदद से डॉक्टर आप की बीमारी को जल्दी पकड़ लेगा और सही इलाज कर पायेगा।

चूँकि किसी की भी मेडिकल हिस्ट्री उसके इलाज के लिए बहोत इम्पोर्टेन्ट होती है और इसके आधार पे ही हर individual इंसान के हिसाब से अलग दवा बनाई जा सकती है, जिससे आप बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे।

डिजिटल हेल्थ है क्या?

डिजिटल हेल्थ आपकी हेल्थ, हेल्थ केयर, लिविंग सोसाइटी आदि को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़कर मोबाइल हेल्थ, हेल्थ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, टेलीहैल्थ, टेलीमेडिसिन आदि की मदद से आपको पर्सनलाइज्ड मेडिसिन और उपचार उपलब्ध कराएगा।

भविष्य मे डिजिटल हेल्थ वन पर्सन, वन हेल्थ रिकॉर्ड के बेस पर काम करेगा जिसमें हर एक इंसान का एक अलग रिकॉर्ड होगा जिसे नेशनल हेल्थ केयर सिस्टम से जोड़ा जाएगा तथा साथ ही इस डाटा को क्लिनिकल रिसर्च में भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे की आपके लिए इफेक्टिव तरीके से दवा बनाई जा सके।

तो होता यह है कि जब आपकी तबीयत खराब होती है तो आप डॉक्टर के पास जाते हैं और चुकी डॉक्टर को आपके पास्ट मेडिकल रिकॉर्ड और बॉडी छमता या इम्युनिटी के बारे में पता नहीं होता इसलिए वह ढेर सारे टेस्ट लिख देता है तथा उन टेस्ट के कारण जो बीमारी डॉक्टर को समझ में आती है, उस हिसाब से आपको दवा देता है ।

वही हर इंसान में एक ही दवा अलग-अलग तरीके से इफेक्ट करती है और सभी लोगों में एक जैसी इफेक्टिव नहीं होती वही इस तरीके में काफी टाइम और पैसे भी लगते हैं।

वन पर्सन वन मेडिकल रिकॉर्ड का क्या मतलब है

अभी हम personalised दवा के बारे में हम सोच भी नही सकते, इसलिए भविष्य में डिजिटल हेल्थ को अपनाने की शुरुआत की जा रही है जिसमें किसी इंसान के पैदा होने से लेकर मरने तक का एक रिकॉर्ड होगा और उसमें उसकी हेल्थ का पूरा डाटा रहेगा।

जिसमें उसे कब वैक्सीन लगी कब वह बीमार हुआ और उसके ऊपर कौन सी दवा का कैसा असर रहा आदि के साथ कही उसे किसी चीज से एलर्जी तो नहीं या फिर उसकी फैमिली में कोई ऐसी जेनेटिक बीमारी तो नहीं जो उसे फ्यूचर में हो सकती है आदि सभी जानकारिओं का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा।

डिजिटल हेल्थ के अंतर्गत आप जिस भी हॉस्पिटल में अपना इलाज कर आएगा, वह हॉस्पिटल आपके मेडिकल डाटा में इंट्री करता रहेगा और प्रेजेंट के ट्रीटमेंट को उसमें अपडेट करेगा। वही यह डाटा आपके स्मार्टफोन या पहने गए स्मार्ट वॉच के द्वारा भी अपडेट होता रहेगा और आप कितना सोए और आपने कितनी एक्सरसाइज की यह सब मेजर करके आपके मेडिकल हिस्ट्री में फीड करता रहेगा।

यह सारा प्रोसेस A.I. बेस्ट होगा, जिसकी वजह से अगर आपके बॉडी में कुछ अनयूजुअल एक्टिविटी होने पर जैसे कि लगातार स्ट्रेस में रहने पर हाई पल्स को डिटेक्ट करके आप को मॉनिटर किया जाएगा और आप को हार्ट अटैक होने से पहले ही आप को एलर्ट कर दिया जाएगा, जिससे कि आप अवेयर हो जाए और टाइम पर डॉक्टर से कंसल्ट कर सके। क्योंकि आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक जगह पर होगी तो डॉक्टर को ज्यादा टाइम नहीं लगेगा और आपके हिसाब से पर्सनलाइज्ड इलाज शुरु कर देगा।

डिजिटल हेल्थ के कार्यान्वयन टेस्ट का रिजल्ट कैसा रहा

डिजिटल हेल्थ की शुरुआत अफ़्रीका के कुछ जगहों पर करके देखी गई जहां पर बच्चे के पैदा होते ही उनके हेल्थ रिकॉर्ड को एक जगह पर स्टोर किया गया तथा बच्चे को कब किस चीज का टीका लगना है उनके पेरेंट्स को मैसेज करके बताया गया तथा इसके साथ ही स्मार्ट बैंड के जरिए उनकी नींद और बीपीएम को लगातार मॉनिटर किया गया।

वही किसी परेशानी के होने पर उनके पेरेंट्स वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टर से कंसल्ट करके सही नॉलेज ले सके और डॉक्टर भी उस हेल्थ रिकॉर्ड की मदद से उन्हें सही प्रिसक्रिप्शन दे सके। तो इन सब प्रोसेस से एक तो पेरेंट्स की हेडेक कम हुई थक उन्हें भागदौड़ भी कम करनी पड़ी, वही उनके पैसे भी बचे ।

तो ऐसे ही डिजिटल हेल्थ के अंतर्गत आपको एक्सरसाइज करने अच्छी नींद लेने तथा स्ट्रेस कम करने आदि में आपकी हेल्प की जाएगी तथा आपका सारा मेडिकल हिस्ट्री का एक जगह डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिसकी मदद से आपके इम्यूनिटी और बॉडी के हिसाब से आपके लिए व्यक्तिगत दवाई बनाई जाएंगी तथा आपका इसी मेडिकल रिकॉर्ड के हिसाब से आपका मेडिकल ट्रीटमेंट भी किया जाएगा।

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