मेगापिक्सेल या पिक्सेल की साइज अच्छी इमेज के लिए इनमे से क्या जरूरी ?

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क्या आप जानते है हमारे पृथ्वी की ऑर्बिट में मौजूद हबल टेलिस्कोप महज 16 मेगपिक्सेल का है और जबकि हमारी आंखें 576 मेगापिक्सल की है, फिर भी यह टेलीस्कोप हमारी आंखों की तुलना में 100 करोड़ गुना ज्यादा क्लियर देख सकता है। तो आइए इस कंफ्यूजन को दूर करते हुए हम बात करेंगे मेगापिक्सल की है और क्या एक क्लियर इमेज के लिए ज्यादा मेगापिक्सल का कैमरा होना जरूरी है तो आइए इसके बारे में जानते हैं।

पिक्सेल क्या होता है ?

पिक्सेल जो कि एक इमेज की सबसे छोटा एलिमेंट होता है, ऐसे ढेर सारी पिक्चर मिलकर एक इमेज को बनाते हैं और किसी भी इमेज में जितने ज्यादा पिक्सेल होंगे वह इमेज उतना ही ज्यादा क्लियर होगी और उसे उतना ही ज्यादा जूम करके देख सकते हैं जिसमें इमेज फटेगी नहीं।

एक इमेज में पिक्सेल आरजीबी कलर वाले 3 सब- पिक्सेल से मिलकर बना होता है जो कि उस पिक्सेल में इमेज के लिए कलर को प्रोड्यूस करते हैं।

कैमरे में पिक्सेल का क्या काम होता है ?

अगर हम बात करें कैमरे में पिक्सेल की तो या कैमरे के सेंसर की सबसे छोटी यूनिट होती है जोकि इमेज के लिए लाइट को कैप्चर करती है और ऐसे ही 10 लाख कैमरा पिक्सल मिलकर 1 मेगापिक्सल बनते हैं।

कैमरे का हर एक पिक्सेल जितना बड़ा होगा वह उतना ही ज्यादा लाइट को अब्सॉर्ब करेगा और उसे उतना ही ज्यादा एक्सपोजर मिलेगा जिससे की फोटो की हर पिक्सेल उतनी ही क्लियर होगी ।

क्या ज्यादा मेगापिक्सल के होने से इमेज ज्यादा बेटर आती है ?

अब हम बात करते हैं कि क्या ज्यादा मेगापिक्सल के होने से इमेज ज्यादा बेटर आती है तो हां किसी भी इमेज में जितने ज्यादा पिक्सेल होंगे उसमें उतनी ज्यादा डिटेलिंग होगी लेकिन इसके साथ ही कैमरे के पिक्सेल के साइज का रोल है । यानी कि अगर पिक्सेल की साइट छोटी होगी तो उसके सेंसर में कम लाइट जाएगी और पिक्चर में नॉइस बढ़ेगी तथा उसकी डायनामिक रेंज कम हो जाएगी।

कम लाइट जाएगी और पिक्चर में नॉइस बढ़ेगी तथा उसकी जाने में की रेंज कम हो जाएगी। इसी वजह से 16 मेगापिक्सल या 20 मेगापिक्सल के डीएसएलआर कैमरे की फोटो आज के स्मार्टफोन के 108 मेगापिक्सल के कैमरे की पिक्चर से अच्छी दिखती हैं क्योंकि इनके कैमरे के हर एक पिक्सेल के सेंसर काफी बड़े होते हैं।

डीएसएलआर तथा स्मार्टफोन के कैमरों के सेंसर के साइज में अंतर

तो जहां एक डीएसएलआर कैमरे के पिक्सेल की साइज लगभग 408 माइक्रोमीटर यानी कि माइक्रोन तक होती है वही अच्छे स्मार्टफोन के पिक्सेल के साइज औसतन 0.8 माइक्रोन से 1.5 माइक्रोन के बीच ही होते हैं यानी कि ये डीएसएलआर कैमरे की तुलना में 5 से 6 गुना तक आकार में छोटे होते हैं जिसकी वजह से इनके एरिया के हिसाब से लगभग 16 गुना तक कम लाइट पहुंचती है।

वही हबल टेलीस्कोप की बात करें तो उसके हर एक पिक्सेल की साइज 26 माइक्रोन के करीब है इसकी वजह से उसके सेंसर में लाइट का एक्सपोजर काफी ज्यादा है जिसकी वजह से वह काफी बेटर पिक्चर लेता है।

अब हम इसे इस तरीके से समझते हैं कि अगर हमें ₹5 में एक फुल साइज समोसा मिलना है और हमें दो समोसे चाहिए तो हम सेम साइज का दो समोसा ना ले कर के उसके आधे आधे साइज के उतने ही दाम में दो समोसे खरीदें, तो यह बात तो वही हुई कि जितना एक सेंसर लाइट को अब्सॉर्ब करता है उतना ही लाइट दो छोटे पिक्सेल सेंसर मिलकर अब्सॉर्ब करेंगे जिससे कि कैमरा के मेगापिक्सल का नंबर तो बढ़ जाएगा लेकिन उसके पिक्चर की क्वालिटी में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।

आईफोन तथा गूगल पिक्सेल स्मार्टफोन के कैमरों के कम मेगापिक्सेल होने पर भी अच्छी पिक्चर क्वालिटी होने के पीछे क्या रीजन है ?

आईफोन और गूगल पिक्सेल स्मार्टफोन के कैमरे बड़े पिक्सल साइज होने की वजह से बाकी स्मार्टफोन से कम मेगापिक्सल होने पर भी अच्छी पिक्चर लेते हैं तो इसके पीछे बड़ा पिक्सल साइज भी एक वजह है। क्योंकि जहां सैमसंग सायोमी वनप्लस के फोन के कैमरे की पिक्सल साइज जीरो पॉइंट 8 माइक्रोन है वही आईफोन तथा गूगल पिक्सेल स्मार्टफोन के पिक्सेल 1.4 माइक्रोन साइज के हैं।

वही इनमे इनमें ड्यूल पिक्सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है यानी कि इनके हर एक पिक्सेल में दो फोटोडायोड होते हैं जो कि डिफरेंट एंगल से लाइट को कैप्चर करते हैं यानी कि इन स्मार्टफोन के 12 मेगापिक्सल के कैमरे अन्य कंपनी के स्मार्टफोन के 48 मेगापिक्सल के कैमरे के बराबर हैं।

क्या सिर्फ बड़ा पिक्सल साइज ही अच्छी फोटो के लिए जरूरी है?

एक अच्छी फोटो के लिए बड़े पिक्सल साइज वाले ज्यादा मेगापिक्सल कैमरे के अलावा कैमरे का अपर्चर, उसकी शटर स्पीड तथा सेंसर की क्वालिटी के साथ-साथ उसके प्रोसेसर पर भी डिपेंड करता है। यानी कि जितना अच्छा सेंसर की क्वालिटी होगी और फास्ट प्रोसेसर होगा उतनी जल्दी वह पिक्चर को क्लिक करने के साथ ही लाइट को बेहतर तरीके से प्रोसेसर के पिक्चर बनाएगा।

यानी कि एक समान कंपनी का 48 मेगापिक्सल का कैमरा सेंसर स्नैपड्रेगन 600 सिरीज़ स्मार्टफोन की तुलना में स्नैपड्रेगन 800 सीरीज के स्मार्टफोन में ज्यादा बेहतर इमेज प्रोड्यूस करेगा और बेहतर पिक्चर लेगा।

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