स्मार्टफोन कंपनियों के 5 झूठ जो आपकी आँखे खोल देगा

स्मार्टफोन कंपनियो के 5 झूठ जिसे सुनकर आपको गुस्सा आ जायेगा
स्मार्टफोन कंपनियो के 5 झूठ जिसे सुनकर आपको गुस्सा आ जायेगा

हम जैसे ही कोई नया स्मार्टफोन लेते हैं तो उसके कुछ महीने के बाद ही उसका अपडेटेड वर्जन आ जाता है और उस नए वर्जन में बहुत ही थोड़ा सा डिजाइन में चेंज करके तथा उसके हार्डवेयर और कैमरे में एकदम -माइनर सा अपडेट करके उसे इस तरीके से प्रजेंट किया जाता है कि अब उस नए फोन के सामने आपका पुराना स्मार्टफोन एकदम बेकार हो चुका है और ऐसा करके आपको नए स्मार्टफोन खरीदने के लिए उकसाया जाता है। वही इसके लिए कई बार कंपनियां flase advertisement भी करती है ।

स्मार्टफोन कंपनियों द्वारा अपने प्रोडक्ट्स का फर्जी एडवर्टाइजमेंट

Realme narzo30 के लॉन्च इवेंट में iphone का उपयोग
Realme narzo30 के लॉन्च इवेंट में iphone का उपयोग (Image credit: Realme/YouTube)

हाल ही में Realme द्वारा फर्जी बेंचमार्क स्कोर दिखाने की वजह से उसके फ्लैगशिप स्मार्टफोन GT 5G को antutu के द्वारा 3 महीने के लिए बैन कर दिया गया तथा तथा उसी के दूसरे स्मार्टफोन Narzo 30A के एक लांच इवेंट में गेम के डेमोंस्ट्रेशन के दौरान iPhone के इस्तेमाल किये जाने की वजह से कंपनी के फर्जी एडवर्टाइजमेंट की पोल खुल गयी है।

ऐसा ही नहीं कि सिर्फ एक कंपनी ने ऐसा किया बल्कि नोकिआ, सैमसंग, हुवाई तथा एप्पल जैसी स्मार्टफोन कंपनी भी false एडवरटाइजमेंट करती है और अपने प्रोडक्ट को बढ़ा चढ़ा करके दिखाती हैं, ताकि वह दूसरे कंपनी के बजाय अपने कंपनी के स्मार्टफोन को बेहतर दिखा सके तथा जिससे वे अपने स्मार्टफोन को खरीदने के लिए लोगो को मजबूर कर सकें।

5 ऐसी चीजे जिनके बारे में स्मार्टफोन कंपनियां गलत प्रचार करती हैं

वैसे तो बहोत सी चीजे है जो कम्पनिया अपने कस्टमर्स से छुपाती है, लेकिन हम उन 5 मुख्य चीजों के बारे में बात करते है जिनके बारे में स्मार्टफोन कंपनी अक्सर गलत प्रचार करती है:

1. स्मार्टफोन का कैमरा

तो उनमें से सबसे पहले आता है स्मार्टफोन का कैमरा जिसके बारे में सबसे अधिक भ्रम फैलाया जाता है, कंपनियां स्मार्टफोन के लांच के समय ऐसे-ऐसे फोटोस दिखाती हैं और उन फोटोज का टीवी पर प्रचार करती हैं कि,जैसे कि उनके स्मार्टफोन के कैमरे के सामने DSLR भी फेल है।

वही वह अपने 20-30 हजार के स्मार्टफोन के कैमरे को आईफोन या फिर पिक्सेल स्मार्टफोन के कैमरे से भी बेहतर दिखा देती है, लेकिन सच तो यह है कि यह सब अधिकांश झूठ होता है तथा प्रचार के दौरान कैमरा सैंपल में दिखाई जाने वाली यह फोटोस किसी डीएसएलआर कैमरे से क्लिक की गयी होती है, और यह किसी प्रोफेशनल फोटोग्राफर के द्वारा परफेक्ट वातावरण में ली जाती है जिससे वह अच्छी दिखे।

कंपनी अपने स्मार्टफोन के कैमरे से खींची गई रॉ फोटोस को नहीं दिखाती, बल्कि उसे काफी हैवी सॉफ्टवेयर की मदद से एडिट करके उसमें ढेरों फिल्टर लगाकर परफेक्ट बनवाती है तथा उसके बाद हमें दिखाती है। वहीं अगर आपने उस स्मार्टफोन को खरीद भी लिया तो भी आपको सालो लग जाएंगे लेकिन वैसी एक भी फोटो आप नही खींच पाएंगे।

Nokia Pureview faked ad
Nokia Pureview faked ad (Image credit: theverge.com)

वैसे ये ट्रेंड शुरू से चलता आया है जिसमें नोकिया लुमिया 920 से लेकर हवाई नोवा 3 जैसे स्मार्टफोन के एडवर्टाइजमेंट में, डीएसएलआर या किसी दूसरे स्मार्टफोन के कैमरे की फ़ोटो को इन स्मार्टफोन्स का बता कर प्रचार किया गया लेकिन किसी तरीके से लोगों ने इसे पकड़ लिया ।

2. स्मार्टफोन के प्रोसेसर और उसकी कैपेबिलिटी

अब दूसरा सबसे बड़ा झूठ बोला जाता है स्मार्टफोन के प्रोसेसर और उसकी कैपेबिलिटी को लेकर। तो मार्केट में जैसे ही नया प्रोसेसर आता है लगभग सभी कंपनी उसे लेकर अपना स्मार्टफोन लॉन्च करती है लेकिन वह इसे इतना ज्यादा हाईलाइट करती है कि जैसे इससे पहले का प्रोसेसर एकदम स्लो था और यह लेटेस्ट प्रोसेसर एकदम लाइट की स्पीड से वर्क करेगा।

लेकिन क्या सच में नया प्रोसेसर इतने तेज होते हैं, ऐसा नही है बल्कि जो भी नया प्रोसेसर लॉन्च होता है वह पुराने प्रोसेसर से महज कुछ मिली सेकंड ही तेज होता है जोकि हम नोटिसी नहीं कर सकते। पुराने प्रोसेसर भी नए प्रोसेसर की ही तरह सारे टास्क बहुत तेजी से कर सकते हैं और आपको चाहे गेम खेलना हो या कोई ऐप रन करना आपको कोई डिफरेंस समझ में ही नहीं आएगा।

हां यह डिफरेंस तब जरूर समझ में आएगा जब आप एक स्नैपड्रैगन 600 सीरीज को 700 सीरीज से या स्नैपड्रैगन 700 सीरीज को 800 सीरीज के प्रोसेसर से कंपेयर करेंगे क्योंकि इनका आर्किटेक्चर ही अलग है। लेकिन आप एक ही सीरीज में 2 या 3 जनरेशन जैसे कि स्नैपड्रैगन 845, 855 या 865 के बीच में तुलना करे तो आप परफॉर्मेंस के बेस पर डिफरेंस नहीं समझ पाएंगे, भले ही इनके बेंच मार्क का डिफरेन्स कितना भी ज्यादा क्यों ना हो।

3. स्मार्टफोन का डिस्प्ले

वही स्मार्टफोन में तीसरी सबसे अधिक गलत एडवर्टाइजमेंट किए जाने वाली चीज हैं उसका डिस्प्ले, जिसमें ना जाने कौन-कौन से टेक्नोलॉजी जैसे की रेटीना डिस्प्ले, सुपर अमोलेड, एलसीडी, OLED आदि आती है। ​इसमें कभी सेंटर में या कॉर्नर में notch देकर या डिस्प्ले को थोड़ा सा कर्व करके इसका इतना ज्यादा हाइप बनाया जाता है की इस डिस्प्ले के साथ यह स्मार्टफोन एकदम कूल लगेगा और उसमें देखने पर हमें कोई दूसरा ही दुनिया दिखेगी

वैसे हा डिस्प्ले की पीपीआई तथा hdr10 या एक्सडीआर जैसे टेक्नोलॉजी डिस्प्ले की क्वालिटी को बेटर बनाते हैं लेकिन डिस्प्ले के टाइप से इतना भी ज्यादा पिक्चर क्वालिटी पर फर्क नहीं पड़ता है और इतना ज्यादा तो बिल्कुल नहीं की जिसके लिए आप एकदम नया स्मार्टफोन खरीदे।

यहां तक की डिस्प्ले की रिफ्रेश रेट भी बहुत ज्यादा मैटर नहीं करता है और 120hz के डिस्प्ले वालों स्मार्टफोन के अंदर मैक्सिमम ट्रांजेक्शन एनिमेशन 60hz पर ही काम करते हैं। तो जब तक 4-5 साल ना हो जाए तबतक फ्लैगशिप स्मार्टफोन के डिस्प्ले में इस पीरियड्स में नए फोन के मुकाबले कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

यहां तक की कंपनियां डिस्प्ले को बेहतर दिखाने के लिए अपने एडवरटाइजमेंट में स्मार्टफोन के डिस्प्ले को कुछ ज्यादा ही कलरफुल और कर्व शेप में दिखाती है। ऐसा ही xiomi ने कुछ समय पहले अपने स्मार्टफोन के एडवरटाइजमेंट में किया जिसकी वजह से वह स्मार्टफोन कोई अलग ही मॉडल का दिखने लगा।

4. स्मार्टफोन से हेडफोन जैक को हटा देना

कंपनियों का चौथा झूठ है कि स्मार्टफोन में ज्यादा स्पेस बनाने के लिए हेडफोन जैक को हटा देना। एप्पल जैसे कंपनी ने 2017 में अपने स्मार्टफोन से हेडफोन जैक यह बोलकर हटा दिया कि इससे उसके अंदर इक्विपमेंट के लिए स्पेस बढ़ेगा, जिसके बाद कई और कंपनियो ने ऐसा करना शुरू कर दिया।

तो होता यह है कि शुरू से ही सभी कंपनी स्मार्टफोन के साथ ईरफ़ोन देती आई हैं और उसका पैसा फोन की एमआरपी से जोड़ कर लेती आई है, लेकिन ज्यादा प्रॉफिट कमाने के चक्कर में कंपनी ने ईयर फोन को ना देने के लिए सोचा लेकिन वह इतने से ही खुश नहीं हुए, वह इसी के साथ अपने वायरलेस एयर बर्ड्स और इयरफोंस को बेचने की जुगत में स्मार्टफोन से हेडफोन जैक को ही हटा दिए, जिससे कोई दूसरी कंपनी के वायर्ड इयरफोंस इनमें ना लगा सके।

कंपनियों ने इसके लिए बहाना क्या दिया की इससे स्पेस बचेगा, जबकि इसके इतने सालों बाद तक कई सारे फ्लैगशिप स्मार्टफोन 3.5mm जैक के साथ आ रहे और उनमे आज पहले से बहुत बेटर और नई टेक्नोलॉजी इस्तेमाल हो रही। साथ ही हैडफ़ोन जैक होते हुए भी इनमें से कई सारे स्मार्टफोन वाटरप्रूफ भी है।

5. ऑनलाइन फ्लैश सेल में स्मार्टफोन का आउट ऑफ स्टॉक होना

पांचवा झूठ फ्लैश सेल में स्मार्टफोन के आउट ऑफ स्टॉक होने का है। आपने कभी ऐसा सेल्स में पता चला है कि कितने स्मार्टफोन यूनिट इस सेल में बिकने वाले थे और उनमे से कितने बिके, नही ना क्योंकि यह कंपनी आपको कभी नहीं बताएगी।

देखिए अगर कोई छोटी मोटी कंपनी हो और उसके प्रोडक्ट खत्म हो जाये तो समझ में आता है, लेकिन फ़्लैश सेल में टॉप ब्रांड के स्मार्टफोन बिकते हैं, ये कंपनी एक बार में लाखों स्मार्टफोन यूनिट का प्रोडक्शन करती है, लेकिन इतने सारे स्मार्टफोन यूनिट ऐसे फ़्लैश सेल में मिनटों नहीं, बल्कि सेकंडों में ही बिक जाते हैं। तो यह जान लीजिए पूरी तरह फ्रॉड है और आप को बेवकूफ बनाया जाता है।

ऐसा कंपनी प्रोडक्ट की हाइप बनाने के लिए करती है और कुछ ही सेकंड में साइट को क्लोज कर के आपको लंबे टाइम तक वेट करने के लिए मजबूर करती है।

ये सारी चीजे यही ख़त्म नहीं होती

वैसे ऐसे बहुत सी चीजें जैसे कि रैम, फास्ट चार्जर, सिस्टम अपडेट,नॉन रिमूवल बैटरी जैसे बहुत ही चीजो के सिर्फ नंबर गेम में आपको उलझा कर नए स्मार्टफोन खरीदने के लिए स्मार्टफोन कंपनियां आपको उकसाती है।

वैसे अगर आप किसी मिड रेंज यह सस्ते स्मार्टफोन से हाईएंड स्मार्टफोन की और जा रहे हैं और उसमें अपग्रेड कर रहे हैं तो यह ठीक है, क्योंकि इसमें आपको बिल्कुल नया एक्सपीरियंस मिलेगा, लेकिन अगर आपके पास पहले से हाईएंड फ्लैगशिप स्मार्टफोन है और उसका कोई नया मॉडल आया हो तो आप उसे जरूर खरीदने से बचे।

क्योंकि आप 40-50 हजार लगाकर सिर्फ एक दो फीचर की वजह से नया मोबाइल ले भी लेंगे तो भी आपकी लाइफ में कोई वैल्यू ऐड नहीं होने वाली, बल्कि कुछ दिन में वह भी पुराना ही हो जाएगा। तो जब तक आपका अपना पुराना स्मार्टफोन काम कर रहा है और आपके सारे काम उसमें हो जा रहे तब तक उसी से काम चलाना ही समझदारी है वरना स्मार्टफोन कंपनी चाहती ही है कि आप हर साल उनका नया फोन ले जिससे उनकी कमाई बढ़े ।

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