मजेदार गूगल गेम्स जिन्हे आप ब्राउज़र में सर्च करके खेल सकते है

गूगल सर्च में मजेदार गेम्स
गूगल सर्च में मजेदार गेम्स

गूगल हमेशा अपने सर्च पेज पर कई मजेदार गेम्स देता आया है जिसे खेलने के लिए उस गेम को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती। वैसे हम पहले ऐसे ही बहुत से ऑनलाइन गेम्स गूगल पर सर्च करके या किसी वेबसाइट पर जाकर खेल सकते थे, लेकिन 20 दिसंबर 2020 से आधिकारिक रूप से adobe flash player के बन्द होने के बाद से ऐसे गेम्स भी खत्म हो गए।

लेकिन अभी भी कुछ Arcade games गूगल पर सर्च करने पर आपको मिल जाते हैं जिन्हें आप किसी भी समय अपनी बोरियत को दूर करने के लिए खेल सकते हैं।

गूगल गेम्स क्या है?

गूगल अपने सर्च रिजल्ट पेज को अट्रैक्टिव बनाने के लिए साल 2000 से ही कई तरह के ईस्टर एग्स, जोक्स और गेम्स लाता रहता है जिन्हे आप कुछ खास कीवर्ड को सर्च करके देख सकते है।

इसी तरह से गूगल गेम्स सर्च रिजल्ट्स पेज में उस गेम का नाम सर्च करने पर दिखाई देता है जिसे आप कभी भी खेल सकते है। इन गेम्स में क्लासिक आर्केड गेम्स आते हैं जोकि फ्री हैं और किसी ज़माने में ये काफी पॉपुलर थे।

गूगल सर्च रिजल्ट पेज में आने वाले गेम्स

गूगल में समय समय पर कई गेम्स उसके डूडल्स और ईस्टर एग्स के रूप में आते रहते हैं। जिन्हे आप गूगल के डूडल्स तथा गूगल मिरर की वेबसाइट पर जा कर के खेल सकते हैं। वहीं अभी भी कई ऐसे गेम्स हैं जोकि गूगल के सर्च रिजल्ट में आते हैं और उम्मीद है कि आगे भी मौजूद रहेंगे।

गूगल के सर्च रिजल्ट में आने वाले कुछ पॉपुलर गेम्स इस प्रकार है:

Pack-Man game in google search result
Pack-Man game in google search result

1980's में आया pac-man सबसे पॉपुलर आर्केड गेम्स में से एक है जिसमे मुख्य किरदार के पीछे 4 भूत पड़े रहते है जिनसे उसे बचना रहता है और गेम के अंदर मौजूद सभी डॉट्स को खाना रहता है।
इस गेम को खेलने के लिए आपको गूगल पर जाकर Pac Man या Pac Man Doodle सर्च करना होगा।

Solitaire
Solitaire

यह गेम माइक्रोसॉफ्ट विंडोज के साथ आने वाले लगभग सभी कंप्यूटर में इनबिल्ट आता है। यह ताश के पत्तों का गेम है जिसमें घटते क्रम में और विपरीत रंग के पत्तों को चार पंक्ति में लगाना रहता है तथा इस में छुपे हुए सभी पत्तों को खोलना होता है। इस गेम के लिए आपको गूगल soltaire सर्च करना होगा।

Google tic tak toe
Google tic tak toe

इस गेम को हमने अपने स्कूल में या दोस्तों के साथ कभी ना कभी जरूर खेला होगा। यह एक आसान सा पेपर पेन गेम है जिसे खेलने के लिए आपके दिमाग का शार्प होना जरूरी है।

इस गेम को आप गूगल में जाकर tic-tac-toe सर्च करके खेल सकते हैं। इसके अंतर्गत आपको तीन डिफिकल्टी लेवल इजी , मीडियम और इंपॉसिबल मोड मिलते हैं तथा इसके साथ आपको ''प्ले अगेंस्ट ए फ्रेंड'' का भी ऑप्शन मिल जाएगा।

Snake game
Snake game

यह गेम नोकिया के पुराने हैंडसेट में प्री इंस्टॉल आता था। गूगल सर्च रिजल्ट पेज में आने वाला स्नेक गेम थोड़ा कलरफुल है और यह एप्पल खाता है। गेम में स्नेक हर बार सेब खाने पर बड़ा होता जाता है तथा इसे चारों तरफ के दीवार से टकराने से बचाना होता है।

Minesweeper Game in Google search
Minesweeper Game in Google search

यह अपने नाम के अनुसार ही माइंस गेम हैं जिसमें आपके स्किल और लक दोनों की जरूरत होती है। अच्छी स्किल से आप हाईएस्ट प्रॉबिटी गेस कर सकते हैं। लेकिन फिर भी आपकी लक की जरूरत होगी। अगर आपको इस गेम की ट्रिक जैसे कि एक साथ कुछ 1 नंबर साथ हो तो उसके कोने में अक्सर बम होने की संभावना बनी रहती है।

Animal Sounds
Animal Sounds

बच्चों को अलग-अलग एनिमल की आवाज से परिचित कराने के लिए ईस्टर एग सबसे अच्छा है। गूगल पर एनिमल साउंड सर्च करते ही आपको वर्तमान में 57 एनिमल जिनमें कई चिड़िया और मछलियां और जंगली जानवरों की आवाजों को प्ले कर के सुनने का ऑप्शन मिल जायेगा।

ये सारे गेम गूगल के सर्च रिजल्ट पेज में ही आते हैं और गूगल के द्वारा ही बनाए गए हैं इसलिए इन गेम्स का मजा लेने के लिए अपने ब्राउज़र में जाकर यह सुनिश्चित कर लें कि आप गूगल सर्च का ही इस्तेमाल कर रहे हैं अन्यथा पहले गूगल सर्च करके उसके होम पेज पर जाना ना भूले।

जाने वो सभी कीवर्ड्स जिनका इस्तेमाल करके गूगल के ईस्टर एग्स का मजा लिया जा सकता है

गूगल के ईस्टर एग्स के साथ मज़े
गूगल के ईस्टर एग्स के साथ मज़े

हम हमेशा गूगल सर्च एक ही फॉर्मेट में देखते हैं जिसमें बस समय-समय पर गूगल का सिर्फ लोगो change होता है और बाकी के सर्च रिजल्ट का डिजाइन हमेशा एक जैसा ही रहता है, लेकिन क्या आपको पता है गूगल fun के लिए ऐसे कई एनिमेशन और ट्रिक्स लाता रहता है जिसे आप उसके सर्च रिजल्ट में कुछ खास word type करके देख सकते हैं और उनका मजा ले सकते हैं।

गूगल दुनिया का सबसे बेहतरीन सर्च इंजन है और यह आपके हर एक सवालों का लगभग सटीक result दिखाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई ऐसे keywords है जिन्हें Google पर सर्च करने पर Google किसी और दौर में पहुंचा जाता है या फिर उल्टा पुल्टा होने लगता है।

गूगल के ईस्टर एग्स क्या है ?

गूगल year 2000 से अपने प्लेटफार्म तथा प्रोडक्ट सर्विसेस में कई तरह के ester eggs, April fool jokes तथा hoaxes को यूज़र्स के fun के लिए add करता आया है। गूगल के ये मजेदार fun tricks काम के बीच मैं थोड़ा मूड को refresh करने के साथ ही दोस्तों से prank करने के लिए भी अच्छे हैं। बस इसके लिए आपको सही keyword और तरीका पता होना चाहिए।

गूगल के सर्च रिजल्ट में कई सारे Easter eggs भी छुपे होते हैं जोकि कोई खास कीवर्ड सर्च करने पर एनिमेशन, हिडन मैसेज या किसी ट्रिक के द्वारा दिखाई देते हैं। वही ये ester eggs ना केवल फन के लिए अच्छे हैं बल्कि इनमे कई सारे ऐसे भी टूल्स हैं जो कि आपके बहुत काम में आ सकते हैं, जिनमें बबल लेवल, metronome और meditate जैसे टूल्स शामिल है

गूगल के बेस्ट ईस्टर एग्स और फन ट्रिक्स

एल्गुग.im (elgoog.im) गूगल का official easter eggs website है जिसे Google mirror नाम से जाना जाता है जिसके अंदर गूगल के कई fun trick और games आते हैं। जिन्हें आप इस आर्टिकल में बताए गए तरीके से Google पर direct search करके भी देख सकते हैं, वही ये tricks अभी भी काम करते हैं।

गूगल का I'm feeling lucky बटन
गूगल का I'm feeling lucky बटन

इन कीवर्ड को डायरेक्ट सर्च करने के लिए आपको गूगल के होम पेज पर जाना होगा जहाँ पर आपको I'm feeling lucky का बटन मिलेगा। आपको कीवर्ड टाइप करने के बाद इसी बटन को क्लिक करके सर्च करना है। वैसे मोबाइल ब्राउज़र में इस बटन के लिए आपको क्रोम ब्राउज़र में ऊपर दाहिनी ओर 3 डॉट पर क्लिक करके डेस्कटॉप मोड को सेलेक्ट करना होगा।

गूगल मिरर के अंतर्गत कुछ ईस्टर एग्स इस प्रकार है:

गूगल ग्रेविटी
गूगल ग्रेविटी

यह ईस्टर एग गूगल सर्च पेज के सभी कीवर्ड्स को ग्रेविटी की वजह से भारी कर देता है जिससे वो निचे गिर जाते है। आप इसमें गूगल तथा बाकी के लेटर पर क्लिक करके उन्हें उछाल कर मजे ले सकते है।

Do a barrel roll
Do a barrel roll

इसे सर्च करते ही गूगल सर्च का पूरा पेज गोल गोल घूमने लगता है। आप इसमें घुमाओ की संख्या को भी लिख सकते है जैसे की do a barrel roll 20 times/ 5.6 times/ twice/ 100 times/ 1000 times और पेज उतनी ही बार रोल करेगा।

Askew का मतलब होता है तिरछा होना और अपने नाम के ही अनुसार इस कीवर्ड को सर्च करने पर गूगल का पेज tilt हो जाता है।

गूगल ज़ेंग रश
गूगल ज़ेंग रश

इसमें कई सारे लाल और पीले कलर के छोटे ज़ेंग रश मिलकर गूगल के सर्च रिजल्ट से टकराते है तथा उसे ख़त्म कर देते है। आप इन ज़ेंग रश पर क्लिक करके इन्हे सर्च रिजल्ट से टकराने से रोक सकते है लेकिन इतने सारे ज़ेंग रश को रोक पाना आसान काम नहीं है।

Google let it snow
Google let it snow

इस ईस्टर एग में आप गूगल के सर्च पेज में आप बर्फ़ की बारिश का मज़ा ले सकते है। Google let it snow सर्च करने पर लगातार बर्फ़ गिरने से पूरा सर्च रिजल्ट बर्फ़ से ढक जाता है जिसे आप defrost बटन पर क्लिक करके पिघला सकते है।

ये कीवर्ड आपको रिडायरेक्ट करके गूगल मिरर के पेज में ले जाएगा जहाँ पर गूगल सर्च पानी में डूबा होगा। इस पानी के अंदर गूगल तैरता हुआ दिखेगा जिसमे रिफ्लेक्शन की वजह से गूगल उल्टा दिखाई देगा और साथ ही पानी में कुछ मछलिया दिखाई देंगी जोकि आपको समुद्र के भीतर का अनुभव कराएंगी।

Google Thanos
Google Thanos

गूगल का यह ईस्टर एग बहोत पॉपुलर है, जिस तरह एवेंजर मूवी के सीन की तरह उसका विलन थानोस इंफिनिटी गौंटलेट की मदद से एक चुटकी से आधे ब्रम्हांड के जीवो को गायब कर देता है, उसी तरह इसमें दिख रहे गौंटलेट पर क्लिक करने पर गूगल के सर्च रिजल्ट एक-एक करके गायब होने लगते है।

पहले इस ईस्टर एग को डायरेक्ट सर्च करके देखा जा सकता था लेकिन गूगल ने इसे अब ख़त्म कर दिया है इसलिए इसे अब गूगल मिरर में जाकर ही देखा जा सकता है।

Google Zipper
Google Zipper

सोचिये अगर गूगल एक बैग हो और उसके अंदर से सर्च रिजल्ट निकलते हो, तो ये ईस्टर एग बिल्कुल ऐसा ही है जिसमे गूगल के सर्च में ज़िप लगा हुआ है, जिसे आप खोल और बंद कर सकते है।

Google spring
Google spring

ये ईस्टर एग गूगल के साथ खेलने के लिए बढ़िया है जिसमे गूगल एक स्प्रिंग में बदल जाता है, जिसे आप अपनी मर्ज़ी से खींच तान करके पूरे स्क्रीन में फैला सकते है। इसमें गूगल स्प्रिंग बनाने के बाद खींच कर Goooooooooooooooogle बन बन जाता है।

Google turns upside down
Google turns upside down

गूगल को पलटना हो या उसे उल्टा पुल्टा करना ये ईस्टर एग गूगल सर्च पेज को चारो तरफ घुमा देता है। बस इसके लिए आपको 'गूगल टर्न्स अपसाइड डाउन' सर्च करके i'm feeling lucky बटन पर क्लिक करना है और फ़िर गूगल उलट पुलट होना शुरू हो जाएगा। बार- बार इस इफ़ेक्ट का मजा लेने के लिए आपको गूगल पर क्लिक करना होगा।

Google search mirror
Google search mirror

जिस तरह कुछ भी लिखा हुआ मिरर में हमेसा उल्टा नज़र आता है उसी तरह इस ईस्टर एग में गूगल का सर्च रिजल्ट पलट कर मिरर इमेज बनाता है जिससे की सबकुछ उल्टा दिखाई देता है। इसके लिए आपको सीधे सर्च में जाकर elgoog.im/search टाइप करना होता है।

Google terminal
Google terminal

1980's में जब इंटरनेट अपने शुरुआती दौर में था तब अगर गूगल मैजूद होता तब वह किस तरह दिखाई देता उसका अंदाजा आप इस ईस्टर एग्स से लगा सकते है। गूगल टर्मिनल में आप कुछ बेसिक ऑप्शन को सेलेक्ट करके दिए गए 3 ऑप्शन को सेलेक्ट कर सकते है जिसमे Bulletin Board System, Apple II, Commodore 64 है।

Google in 1998
Google in 1998

क्या आप जानते है गूगल की शुरुआत 1998 में लैरी पेज और सेर्गेन ब्रिन ने मिलकर की थी और उस समय गूगल के पेज में बीटा वर्जन लिखा रहता था। वैसे अगर आपको भी गूगल का शुरुआती होम पेज और सर्च रिजल्ट देखना हो तो ये ईस्टर एग आपको उस समय में ले जाएगा।

Google Sphere
Google Sphere

गूगल का ये थर्ड पार्टी ईस्टर एग देखने में शानदार है जिसमे सर्च पेज के सभी वर्ड गूगल के चारो ओर परिक्रमा लगाते रहते है। इसके नाम अनुसार ही गूगल का पेज वृत्ताकार नज़र आता है।

Bletchley Park
Bletchley Park

Bletchley Park ब्रिटेन में वर्ल्ड वार 2 के समय खुफ़िआ सन्देश के कोडब्रेकर्स का सीक्रेट घर था। गूगल पर इस ईस्टर एग को आप सीधे सर्च कर सकते है जिसमे Bletchley Park का नाम खुफ़िआ कोड की तरफ बदलते हुए दिखाई देता है।

गूगल फ्रेंड्स ईस्टर एग्स

अमेरिकन सिचुएशनल कॉमेडी सीरियल F.R.I.E.N.D.S को ना सिर्फ दुनिया भर में बहुत पसंद किया गया बल्कि गूगल भी इसका फैन है। तभी वह इसके मुख्य कलाकारों के सीरियल फिक्शनल कैरक्टर के नाम पर और उनकी क्वालिटी या हैबिट के अनुसार ester eggs बनाया है जो कि काफी मजेदार है।

गूगल के सर्च रिजल्ट में कई सारे Easter eggs भी छुपे होते हैं जोकि कोई खास कीवर्ड सर्च करने पर एनिमेशन, हिडन मैसेज या किसी ट्रिक के द्वारा दिखाई देते हैं और ऐसे ही गूगल के Easter eggs में है फ्रेंड्स सीरीज के छह मुख्य करैक्टर की habit, जिन्हें उनके के नाम को गूगल पर सर्च करके जो schema markup में रिजल्ट में बने खास आइकन पर करके दिखा जा सकता है।

F.R.I.E.N.D.S के 6 मुख्य कैरेक्टर्स के ईस्टर एग्स इस प्रकार है जिसे आप गूगल पर सीधे सर्च करके देख सकते है।

Joey Tribbiani easter eggs
Joey Tribbiani easter eggs

जोई ट्रिबियानि का F.R.I.E.N.D.S सीरीज में एक फ़ूड लविंग कैरेक्टर था इसलिए गूगल ईस्टर एग्स भी इसी से जुड़ा हुआ है। गूगल में जोई ट्रिबियानि सर्च करने पर इनके नाम के आगे पिज़्ज़ा की इमेज बना होगा, जिसे क्लिक करने पर कई सारे फ़ूड के पॉपअप बनेंगे जिसे एक हाथ इकट्ठा करेगा और साथ ही 'Joey doesn't share food' की आवाज़ आएगी।

Chandler Bing easter eggs
Chandler Bing easter eggs

चैंडलर बिंग का किरदार एक रोमांटिक उपन्यासकार का रहता है और गूगल सर्च में इनके नाम के आगे एक सोफ़ा बना हुआ रहता है, जिसे क्लिक करके पर स्क्रीन पर एक बत्तख और उसका चूजा घूमने लगते है।

Monica Geller easter eggs
Monica Geller easter eggs

F.R.I.E.N.D.S. सीरीज़ में मोनिका गेलर एक शेफ़ का काम करती है और ये साफ़ सफ़ाई का खास ख्याल रखती थी। इनके ईस्टर एग में इनके नाम के आगे एक साबुन से भरी बाल्टी बनी रहती है जिसे क्लिक करने पर उस बाल्टी से एक स्पॉन्ज निकल कर इनके नाम को साफ़ करके चमकाता है।

Pheobe Buffey easter eggs
Pheobe Buffey easter eggs

Phoebe Buffay का किरदार स्वीट नेचर का लेकिन अजीब गिटार वादक का था। ये दिल से एकदम बच्ची थी और उनके गाने भी उसी की तरह थे। इनके ईस्टर एग में नाम के आगे गिटार बना है जिसे क्लिक करने पर लोनली कैट गाने के साथ एक बिल्ली स्क्रीन पर घूमने लगती है।

Rachel Green easter eggs
Rachel Green easter eggs

रिचेल ग्रीन का किरदार मशहूर अभिनेत्री जेनिफ़र एनिस्टन ने निभाया है, जिसमे इनका किरदार एक अच्छी और स्टाइलिश गर्ल की थी। इस सीरियल में इनकी हेयर स्टाइल काफ़ी पसंद की गयी जिसे दुनिया भर में और खास कर UK की ढेर सारी लड़किओं ने अपनाया। इनके नाम के आगे इन्ही की हेयर स्टाइल की डमी बनी है जिसे क्लिक करते ही इनकी मशहूर हेयर स्टाइल वाली ढेरो फ़ोटो आ जाएंगी।

Ross Geller easter eggs
Ross Geller easter eggs

रॉस गेलर का कैरेक्टरअपने नासमझ लेकिन प्यारे व्यवहार के लिए जाना जाता है और इसी तरह इनका ईस्टर एग भी काफ़ी मजेदार है।

गूगल पर रॉस गेलर सर्च करते ही शो में दिखाए गए सोफे की ही तरह इनके नाम के बगल में एक सोफ़ा बनकर आता है, जिसे क्लिक करने पर pivot की आवाज़ के साथ स्क्रीन तिरछी हो जाती है। सोफ़े पर बार-बार क्लिक करने पर pivot की आवाज के साथ स्क्रीन का एंगल बदल जाता है और चौथी बार सोफे पर क्लिक करने पर 'Ok guys, I don't think it's going to Pivot anymore' की आवाज़ के साथ सोफ़ा टूट जाता है।

गूगल सेल्फ व्याख्यात्मक ईस्टर एग्स टूल्स

क्रिकेट खेलते समय टॉस के लिए अक्सर पास में सिक्का ना होने की वजह से हम में से कई लोग किसी रैपर, कागज के टुकड़े या पत्ते का सहारा लेते हैं जिसमें अक्सर खेल के शुरुआत में ही विवाद हो जाते हैं. वहीं कई ऐसे गेम्स जैसे कि लूडो ,स्नेक लैडर आदि अगर पास में डाइस ना हो तो खेलना पॉसिबल ही नहीं है।

लेकिन आपको पता है की आप अपने मोबाइल में सिर्फ कुछ कीवर्ड सर्च करके गूगल के सर्च पेज में कई सारे टूल्स जैसे कि कैलकुलेटर, coin फ्लिप, डाइस रोल, सरफेस लेवल ,स्पिनर आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं और इसके लिए आपको किसी ऐप को इंस्टॉल करने या फिर किसी वेबसाइट पर जाने की जरूरत नहीं है।

Google Flip a Coin
Google Flip a Coin

गूगल पर ''फ्लिप अ कॉइन'' सर्च करते ही सर्च रिजल्ट में एक सिक्का आ जाएगा जिसके एक तरफ हेड्स और दूसरी तरफ टेल्स लिखा होगा। टॉस के लिए सिक्के के निचे की तरफ 'फ्लिप अगेन' पर क्लिक करना होगा, जिससे सिक्का घूम कर हमेसा 50-50 रिजल्ट देगा।

Google Calculator
Google Calculator

आजकल सभी डिवाइस में कैलकुलेटर ऍप रहते है लेकिन क्या आपको पता है आप गूगल पर सर्च करने पर भी कैलकुलेटर आता है। कम्प्यूटर के ब्राउज़र में गूगल पर जाकर सर्च करने पर फुल साइज़ कैलकुलेटर आता है तथा मोबाइल ब्राउज़र में न्यूमेरिक कैलकुलेटर आता है जिसे निचे दिए गए Fx बटन पर क्लिक करके एक्सपैंड किया जा सकता है।

Google Roll a dice
Google Roll a dice

दुनिया भर में लगभग 44 से भी ज्यादा ऐसे गेम्स है जिन्हे डाइस की मदद से खेला जाता है तथा जिनमे भारत में पॉपुलर लूडो, पच्चीसी जैसे गेम्स भी शामिल है, वही इनमे अलग अलग आकार और नंबर वाले डाइस की जरूरत होती है।

आप गूगल पर ''Roll a dice'' सर्च कर सकते है जिससे आपको स्क्रीन पर अलग अलग कई नंबर्स वाले डाइस को एकसाथ जोड़कर उसे रोल करने का ऑप्शन मिल जाएगा या फिर आप चाहे तो एक सिंगल डाइस का भी इस्तेमाल कर सकते है।

Google Spinner
Google Spinner

एक साथ कई लोगो के साथ टेबल स्पिन गेम या नंबर गेम खेलने के लिए गूगल का ये टूल बेस्ट है। इस स्पिन टेबल में आप बाये ओर ऊपर की तरफ दिए गए 2 से लेकर 20 नंबर तक जोड़ सकते है। वैसे अक्सर सर्च करने पर स्पिन टेबल की जगह fidget स्पिनर आ जाता है, जिसे आप ऊपर दायी ओर दिए ऑप्शन में नंबर पर सेलेक्ट करके स्पिन टेबल पर आ सकते है।

Google Bubble level
Google Bubble level

ये टूल सिर्फ मोबाइल या टैबलेट पर ही वर्क करता है क्यूंकि इसके लिए डिवाइस में गयरोस्कोपे सेंसर होना जरूरी है। बबल लेवल सर्च करके किसी भी सरफेस का लेवल निकाल सकते है जिससे आपको किसी भी चीज को सीधा रखने में मदद मिलेगी।

गूगल के कुछ अन्य ईस्टर एग्स

गूगल के ईस्टर एग्स बहोत सारे है जिनमे से कुछ ईस्टर एग्स के इस प्रकार है :

मुझे उम्मीद है कि आपको गूगल के इन ईस्टर एग्स और टूल्स के बारे में जानकर मजा आया होगा, अगर आपके मन में कोई सवाल है तो निचे कमेंट बॉक्स में जाकर जरूर लिखे। आपके सवालो का जवाब जरूर दिया जाएगा, वही आप इन ईस्टर एग्स का वीडियो देखने के लिए मेरे यूट्यूब चैनल techwisdom anurag पर भी जा सकते है।

पेपर फोन क्या है और यह हमारे स्मार्टफोन की स्क्रीन में देखने की आदत को कैसे कम करता है?

पेपर फ़ोन
पेपर फ़ोन

हम खुद को बार-बार स्मार्टफोन के screen में देखने से रोक नहीं पाते है और आजकल तो स्मार्टफोन बहुत जरूरी भी हो गए हैं, क्योंकि चाहे हमें ऑनलाइन पेमेंट करना हो या कैलेंडर, वेदर देखना या फिर मैप में लोकेशन देखना अथवा कोई गेम खेलना इन सबके लिए हमें अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना होता है।

लेकिन अगर मैं यह कहूं कि ये पेपर फोन आपके स्मार्टफोन के कई काम को कर सकता है और इसकी वजह से आपके स्मार्टफोन के इस्तेमाल का टाइम कम हो सकता है, तो यह है ना एक ये दिलचस्प बात।

पेपर फ़ोन क्या है?

Google ने लोगों की बढ़ती हुई स्मार्टफोन की हैबिट को कम करने के लिए experiment project शुरू किया है जिसका नाम है Paper Phone. जोकि एक ओपन सोर्स प्रोजेक्ट है तथा Github में available है।

नार्मल यूजर्स गूगल प्ले स्टोर से पेपर फ़ोन ऍप को अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड कर सकते हैं तथा उसकी मदद से अपने जरूरत के कई apps, task, weather, contacts, map तथा paper game जैसी चीजों का प्रिंट निकाल कर उसे फोल्ड करके अपने पॉकेट में रख सकते हैं।

जरूरत पड़ने पर उस foldable paper यानी कि paper phone की मदद से अपने काम कर सकते हैं। अभी इसके अंतर्गत कुल 9 फ़ीचर्स मैजूद है जिनमे से कुछ फीचर अभी डेवलपिंग फेज में है लेकिन भविष्य में इसमें बहोत से सुधार होंगे तथा इसमें कई सारे उपयोगी टास्क और जोड़े जाएंगे।

पेपर फ़ोन इतना उपयोगी क्यों है?

आजकल बहोत से लोग यह महसूस करने लगे है कि वो स्मार्टफोन पर बहोत ज्यादा समय बिताने लगे है जिसकी वजह से उनकी हेल्थ और लाइफ पर असर पड़ रहा है। तो ऐसे लोग जो स्मार्टफोन से थोड़ा सा ब्रेक लेना चाहते है या फिर स्मार्टफोन में बिताने वाले समय को कम करना चाहते है तो ऐसे लोगो के पेपर फ़ोन ऍप बहोत उपयोगी है।

यह ऍप एक छोटा सा एक्सपेरिमेंट है जिसका मकसद टेक्नोलॉजी से होने वाले बुरे प्रभाव को थोड़ा कम करना है। इस ऍप के जरिये आप कुछ जरूरी चीजों का प्रिंटआउट ले सकते है तथा जरूर पड़ने पर स्मार्टफोन के बजाये उस पेपर की मदद ले सकते है।

वही अगर आपको सोशल मीडिया का इस्तेमाल या चैटिंग पर कण्ट्रोल कर लेते है तो आप सच में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को कम कर सख्त है, जिसके बाद आपको सिर्फ जरूरी चीज जैसे के कॉल या मेल के लिए ही अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल रहेगा।

पेपर फ़ोन का इस्तेमाल कैसे करे?

Playstore में पेपर फोन ऐप
Playstore में पेपर फोन ऐप

पेपर फ़ोन का इस्तेमाल करने के लिए आपको सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में गूगल प्ले स्टोर में जाकर पेपर फ़ोन ऍप डाउनलोड करना होगा। जिसके बाद में आपको अपने गूगल अकाउंट से ऍप में sign up करना होगा।

पेपर फोन ऐप होम

गूगल अकाउंट से कनेक्ट होते ही ऍप का डैशबोर्ड खुल जाएगा जिसमे आपको कुल 9 ऑप्शन दिखेंगे जो इस प्रकार है:

1. मैप: इसमें आप अपने तत्कालीन लोकेशन या फिर जहाँ आप चाहते है वह से जहाँ जाना चाहते है उस जगह तक के मैप को सेलेक्ट कर सकते है

2. कॉन्टेक्ट्स: इसमें आप अपने कांटेक्ट लिस्ट में से अधिकतम 7 कोन्टक्ट नंबर्स को प्रिंट के लिए चुन सकते है।

3. कैलेंडर: इस ऑप्शन को सेलेक्ट करने पर आपके गूगल अकाउंट में सेव बर्थडे, फॅमिली या बिज़नेस इवेंट्स तथा नेशनल हॉलिडे आपके पेपर फ़ोन में कैलेंडर हैडिंग के अंतर्गत प्रिंट होंगे।

4. वेदर: इस ऑप्शन में आपको अपने प्रेजेंट लोकेशन या फिर उसमे एडिट करके जहाँ आप जा रहे वहाँ के मौसम का हाल प्रिंट कर सकते है।

5. टॉस्कस: अगर आपके गूगल अकाउंट में कोई टास्क सेव है तो वो इस ऑप्शन को सेलेक्ट करने पर प्रिंट में आ जाएगा और अगर आपके गूगल अकाउंट में कोई टास्क नहीं है तो आपको पेपर फ़ोन के प्रिंट में टॉस्क हैडिंग के अंतर्गत खाली जगह मिल जायेगी जिसमे आप पेन की मदद से कोई नया टास्क लिख सकते है।

6. नोट्स: इस ऑप्शन के अंतर्गत आपके पेपर फ़ोन में नोट्स हैडिंग के अंतर्गत कुछ खाली स्पेस मिल जाएगा जिसमे आप पेन की सहायता से कोई नोट्स लिख सकते है।

7. फोटोज़: इस ऑप्शन के अंतर्गत आप अपने पेपर फ़ोन में अपने स्मार्टफोन की गैलरी से कोई फ़ोटो चुन कर प्रिंट कर सकते है।

8. कॉन्टैक्टलेस: यह एक नया फीचर है जोकि भारत में जल्दी ही शुरू होने वाला है जिसमे आप गूगल पे के जरिये पेमेंट टोकन जेनेरेट कर सकते है तथा उसके पेपर में प्रिंट करके उससे शॉप में स्कैन कराके पेमेंट कर सकते है।

9. पेपर ऍप्स: इसके अंतर्गत कुल 13 पेपर ऍप्स/गेम्स दिए गए है जिसे आप फ्री टाइम में एंटरटेनमेंट के लिए इनमे से किसी एक को प्रिंट कर सकते है, इन पेपर ऍप्स में conversion चार्ट, knots, इटालियन फ्रेजबुक, साइन लैंग्वेज, मल्टिप्लिकेशन टेबल, रेसिपी, ओरिगामी पिजन, सुडोकु, मेज़, वर्ल्ड ऑफ़ द डे, एनाग्रम, रिडल और टाइपोग्राफी है।

इनसब ऑप्शन में से अपने पसंद के ऑप्शंस को चुनने के बाद निचे प्रिंट पर क्लिक करे, जिसके बाद आपको प्रिंट फ्रॉम फ़ोन और क्रिएट पीडीऍफ़ का ऑप्शन आएगा जिनमे से आप अपनी सुविधा अनुसार ऑप्शन को सेलेक्ट करके अपने पेपर फ़ोन का प्रिंट निकाल सकते है।

पेपर फोन ऍप प्रिंटआउट
पेपर फोन ऍप प्रिंटआउट

आपको फाइनल प्रिंटआउट कुछ इस तरह से दिखेगा जिसे आप ऍप में दिए गए इंस्ट्रक्शंस के हिसाब से फ़ोल्ड कर सकते है।

तो इस तरीके से आप अपने पेपर फ़ोन को तैयार कर सकते है और उसके इस्तेमाल से अपने स्मार्टफोन के तरफ देखने का स्क्रीन टाइम कम सकते है।

5 बेस्ट होम प्लॉनर ऍप जिनकी मदद से आप घर का नक्शा और उसका 3D मॉडल बना सकते है

गूगल प्ले स्टोर में बेस्ट हाउस प्लॉनर ऍप्स
गूगल प्ले स्टोर में बेस्ट हाउस प्लॉनर ऍप्स

घर का प्लान बनाते समय बड़ी क्यूरेआसिटी यह रहती है कि घर कंप्लीट होने पर दिखेगा कैसे और अगर आप नए घर में शिफ्ट होंगे तो आपके एक्जिस्टिंग फर्नीचर और सामान उसमें फिट होंगे या नहीं तो इन सबके लिए घर का 3D मॉडल जरूरी हो जाता है।

तो हम कुछ ऐसे मोबाइल एप्स के बारे में बात करते है जिनकी मदद से आप अपने घर के फ्लोर plan तथा इंटीरियर डिजाइन बनाने के अलावा उसका 3D मॉडल भी देख भी सकते हैं।

नए घर की प्लानिंग में मोबाइल ऍप्स कैसे मदद कर सकते है ?

घर की प्लानिंग के लिए कुल 5 स्टेप्स होते हैं जिसका architect हर स्टेट के अनुसार अलग पैसे की डिमांड करते हैं।

जिनमें पहला स्टेप है घर का नक्शा या 2D प्लान दूसरा structural design जिसमें घर के foundation, column, beam आदि का working design होता है तीसरा elevation जिसमें घर का डिजाइन कैसा होगा तथा दिखेगा कैसे तथा चौथा स्टेप 3D model और पांचवा स्टेप estimation यानी कि मटेरियल और लेबर चार्ज मिला करके घर बनाने में कुल खर्च कितना होगा होता है।

तो होता यह है कि लोग शुरू के 2-3 स्टेप तो फॉलो करते हैं क्योंकि यह जरूरी होते हैं लेकिन बाकी के 2 स्टेप को skip कर देते हैं क्योंकि घर का 3D model बनवाना थोड़ा costly होता है और इसके लिए 1 view का खर्च 4 से 6 हजार रुपए तक आ सकता है और 1 view जैसे कि घर के सिर्फ फ्रंट व्यू के लिए आपको इतने पैसे देने पड़ सकते है।

जबकि इनमे से कई काम हम मोबाइल ऍप के जरिये भी कर सकते है और इसके लिए किसी स्पेशल ट्रेनिंग जरूरत भी नहीं। वैसे आपको घर का नक्शा बनाने के लिए आपके पास बेसिक सिविल की नॉलेज जैसे की बीम या कॉलम की लेंथ और उनकी दूरी कितनी आदि की जानकारी जरूरी है।

फ़्लोर प्लानर ऍप्स किस काम में आते है ?

फ्लोर प्लानर ऍप्स में आप घर का floor plan तैयार करने के साथ ही उसमे interior को भी प्लान कर सकते हैं तथा साथ ही उसके 3D मॉडल भी देख सकते हैं। वैसे आप कंप्यूटर के ब्राउज़र में इन सभी ऐप्स की वेबसाइट में जाकर भी यह काम कर सकते हैं और अगर आपके पास घर का 2D प्लान है तो उसे इन app के अंदर same प्लान बना करके उसका 3D view देख सकते हैं।

5 बेस्ट फ्लोर प्लान ऍप्स

इस्तेमाल करने में आसान और 2D डिज़ाइन तथा 3D मॉडल बनाने के लिए बेस्ट ऍप इस प्रकार है:

1. फ़्लोर प्लान क्रिएटर

फ़्लोर प्लान क्रिएटर ऍप
फ़्लोर प्लान क्रिएटर ऍप

यह ऍप गूगल प्ले स्टोर में आर्ट & डिज़ाइन केटेगरी में नंबर 2 पर है जिसमे आप अनलिमिटेड नए प्रोजेक्ट या फ्लोरे प्लान बना सकते है तथा उसमे बहोत सारे स्ट्रक्चर को जोड़ सकते है।

इस ऍप में आप दिवार की लम्बाई तथा मोटाई को एडजस्ट कर सकते है तथा किसी कमरे या पूरे घर का एरिया को सिर्फ लेवल्स ऑप्शन पर क्लिक करके पता कर सकते है। इस ऍप में आपको कमरों आदि में लेवल मार्किंग के साथ ही इसमें घर की इलेक्ट्रिकल बोर्ड तथा इंटीरियर को बदलने की सुविधा मिलती है।

आप अपने प्रोजेक्ट को दोस्तों में शेयर भी कर सकते है तथा इसमें किसी भी समय 2D प्लान को 3D मॉडल में चेंज करके देख सकते है। इस ऍप में वैसे तो सभी चीजे फ़्री है लेकिन इसमें प्रोजेक्ट को एक्सपोर्ट करने तथा उसे प्रिंट करने के लिए आपको कुछ पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

2. प्लानर 5D - होम & इंटीरियर डिज़ाइन क्रिएटर

प्लानर 5D ऍप
प्लानर 5D ऍप

यह ऍप यह ऍप गूगल प्ले स्टोर में हाउस & होम केटेगरी में नंबर 3 पर है जिसमे आप अनलिमिटेड प्रोजेक्ट क्रिएट करने के साथ नक़्शे में फ्लोर जोड़ सकते है। इस ऍप में भी वाल के ओरिएंटेशन तथा उसकी लम्बाई चौड़ाई आदि को अपने हिसाब से सेट कर सकते है।

इस ऍप की सबसे खास बात यह है की इसमें प्रोजेक्ट को 2D से 3D मॉडल में चेंज करने के अलावा आप उसे वर्चुअल रियलिट (VR) में भी देख सकते है। इस ऍप का इंटरफ़ेस तथा इस्तेमाल बहोत ही आसान है तथा इसके अंतर्गत दी गयी प्रोजेक्ट गैलरी से आप नए-नए आइडियाज भी ले सकते है।

3. रूम प्लानर - होम इंटीरियर & फ्लोरप्लान डिज़ाइन डिज़ाइन 3D

रूम प्लानर ऍप यह ऍप यह ऍप गूगल प्ले स्टोर में हाउस & होम केटेगरी में नंबर 2 पर है तथा यह ऍप देखने में आकर्षक होने के साथ ही इसे इस्तेमाल करना काफी सरल है। इसके अंतर्गत आप विभिन्न प्रकार के आकार के कमरे का डिज़ाइन चुन करके 2D या 3D प्लान बना सकते है।

इस ऍप में काफी डिटेल्स में स्ट्रक्चर तथा सामान जैसे के दरवाजे, खिड़की, लिफ्ट, पर्दे, सोफे की वैरायटी दी गयी है। इसके अंदर पहले से ही कई सारे स्ट्रक्चर तथा रूम डिज़ाइन दी गयी है जिन्हे आप इम्पोर्ट करके अपने पसंद के हिसाब से एडिट कर सकते है।

रूम प्लानर ऍप में फाइंड आइडियाज का ऑप्शन दिया गया है जिसमे आप घर को सजाने तथा उसे रेनोवेट करने के ढेर सारे आईडिया ले सकते है। वैसे इन प्रि-मेड टेम्पलेट्स के डायमेंशन को एडिट करने के लिए आपको इस ऍप का पेड सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा।

4. होम डिज़ाइन 3D

होम डिज़ाइन 3D
होम डिज़ाइन 3D

इस ऍप में आप ज्यादा सटीक तरीके से मेज़रमेंट करके घर की प्लानिंग कर सकते है। होम डिज़ाइन 3D ऍप में भी आप ढेर सारे स्ट्रक्चर्स को जोड़ है तथा अपने डिज़ाइन को 3D में देख सकते है।

इस ऍप के अंतर्गत आपको दीवाल की लम्बाई, चौड़ाई मोटाई तथा टेक्सचर आदि को सेट कर सकते है और कार, प्लांट, फर्नीचर आदि को घर की डिज़ाइन में डाल सकते है। वही बाकी होम प्लानर ऍप की तरह इसमें फ्री में नए प्रोजेक्ट तैयार करने का ऑप्शन नहीं मिलता तथा इसके लिए आपको शुरू में ही कमसे कम 30 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

5. ऑटोकैड - DWG व्यूअर & एडिटर

ऑटोकैड ऍप
ऑटोकैड ऍप

यह इस लिस्ट का सबसे दमदार ऍप है जोकि ऑटोकैड सॉफ्टवेयर का ऑफिशल मोबाइल ऍप है। इस ऍप में आप अपने लैपटॉप/कंप्यूटर से सीधे ऑटोकैड की फाइल को इम्पोर्ट कर सकते है तथा उसमे एडिट कर सकते है।

इसके अंदर ढेरो सेलेक्शन टूल है जिसके द्वारा आप अपने घर का 2D प्लान तथा एलिवेशन तैयार कर सकते है। हाँ, इसमें आपको 2D मॉडल से 3D मॉडल में स्विच करने का ऑप्शन नहीं मिलेगा लेकिन इसमें आप एक ही प्रोजेक्ट में कई सारे प्लान को तैयार कर सकते।

इस ऍप को इस्तेमाल करने के लिए आपको पहले साइन-अप करने होगा जिसके बाद इसका 7 दिन का ट्रायल फ्री मिलेगा। वही 7 दिन बीतने के बाद आगे इस्तेमाल करने के लिए आपको इस ऍप का लाइसेंस खरीदना पड़ेगा जो की काफी महँगा है।

गूगल कोर्मो ऍप की सहायता से एन्ट्री लेवल और वर्क फ्रॉम होम जॉब प्राप्त करें

गूगल कोर्मो ऍप में हर तरीके की नौकरी
गूगल कोर्मो ऍप में हर तरीके की नौकरी

अगर आपने कभी ऑनलाइन जॉब सर्च किया है तो आप shine.com, monster job, LinkedIn, indeed जैसे जॉब लिस्टिंग साइट के बारे में जानते होंगे, लेकिन जब कोई व्यक्ति एंट्री लेवल की जॉब जैसे कि कुक, डिलीवरी बॉय, ड्राइवर, तकनीशियन, मशीन ऑपरेटर, होटल रेसिपनिस्ट, कॉल सेंटर, सफाई कर्मी या फिर मैन्युअल वर्क जैसे बेसिक जॉब ढूंढ रहा है, तो उसे इनसब वेब साइटो से कोई खास हेल्प नही मिलती है।

इसके अलावा इन जॉब लिस्टिंग साइटो का इंटरफ़ेस इतना पेचीदा होता है कि एक एंट्री लेवल जॉब ढूंढने वाले इंसान के लिए इन्हें समझना काफी मुश्किल है। तो ऐसी जॉब ढूंढने वाले लोगो के लिए गूगल ने अपना खुद का जॉब लिस्टिंग ऍप kormo बनाया है।

गूगल कोर्मो का इंटरफ़ेस बहोत ही सिम्पल है, और इसमें गूगल के सर्च रिजल्ट में आने वाली सभी जॉब लिस्टिंग साइट्स की वैकेंसी के साथ-साथ खुद गूगल में लिस्ट बहोत सारे फ्रेश जॉब्स भी है जिन्हें गूगल ने खुद वेरीफ़ाई किया है।

गूगल कोर्मो क्या है?

गूगल कोर्मो ऍप
गूगल कोर्मो ऍप

कोर्मो एक बंगाली शब्द है जिसका मतलब कर्म या कर्मा होता है यानी कि हम अपना जो भी काम यह जॉब करते हैं उसे बंगाली में कोरमो कहते हैं और जॉब लिस्टिंग साइट होने की वजह से गूगल ने अपने इस ऍप का नाम कोर्मो रखा। वैसे यह ऐप सबसे पहले गूगल द्वारा 2018 में हमारे बंगाल प्रांत से सटे हुए बांग्लादेश में लॉन्च किया गया, जिसे बाद में 2019 में इंडोनेशिया तथा 2020 में भारत में लॉन्च किया गया।

यह ऍप अभी सिर्फ भारत के १२ बड़े शहरों में जॉब सर्च करने की सुविधा देता है। लेकिन हां शायद जल्द ही यह पॉपुलर होगा और इसमें बहुत सारे शहर जुड़ेंगे क्योंकि गूगल के पास बहुत सारा पैसा और रिसोर्स है और वह अपने एप्स की क्वालिटी और परफॉर्मेंस को लगातार इंप्रूव करता रहता है।

गूगल कोर्मो ऍप के फीचर्स

गूगल के कोर्मो ऍप के फीचर्स की बात की जाए तो इसमें वेरीफाइड एम्प्लॉयर्स के द्वारा फ्रेश जॉब, जॉब एप्लीकेशन की रियल टाइम ट्रैकिंग तथा उनका फास्ट अपडेट और आपके ही द्वारा आसानी से इंटरव्यू की शेड्यूलिं तथा फ्री डिजिटल रिज्यूम जिसे आप अपने पास रख सकते है आदि दिए गए है।

इसके साथ ही इसमें लर्निंग के लिए कई नए स्किल कांटेक्ट जिसमें वीडियो तथा आर्टिकल्स शामिल है इसमें मौजूद हैं। आप इस ऍप में अपने बायो डेटा, प्रोफाइल, इंट्रेस्ट, लैंग्वेज, प्रिफरेंस आदि कभी भी बदल और उसमें एडिट कर सकते है।

गूगल कोर्मो की सबसे अच्छी बात यह है कि यह हिंदी, मराठी , बांग्ला, गुजराती, तमिल, कन्नड़ जैसे लोकल लैंग्वेज बोलने वाले लोग अपने लैंग्वेज में इंटरव्यू और जॉब को चुन सकते है, और इसमे आप अपने घर से काम करने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम जॉब' के लिए भी अप्लाई कर सकते है।

अपने कॉन्टैक्ट नंबर और ईमेल आईडी लिस्ट का बैकअप और प्रिंटऑउट कैसे ले?

आपके कॉन्टैक्ट कभी नहीं खोएंगे
आपके कॉन्टैक्ट कभी नहीं खोएंगे

यह अक्सर कई लोगों के साथ होता है, अगर उनका मोबाइल खराब या फिर खो जाता है और वह नए मोबाइल लेते हैं और उसमें अपने पुराने मोबाइल का गूगल अकाउंट डाल कर अपने पुराने कांटेक्टस को रिकवर करने की कोशिश करते हैं, तो पुराने कांटेक्ट रिकवर तो होते हैं लेकिन उनमें से बहुत सारे नंबर गायब हो जाते हैं।

वैसे एक सामान्य इंसान को पुराने लोगों के नंबर ना मिलने पर भी कोई खास फर्क तो नहीं पड़ता और वह इधर-उधर दूसरे लोगों से संपर्क करके पुराने कांटेक्ट नंबर को पा ही जाते हैं, लेकिन अगर आप कोई प्रोफेशनल, बिजनेसमैन या फिर कारपोरेट सेक्टर में काम करते हैं तो अपने फील्ड के बहुत से लोगों का कांटेक्ट नंबर खोना आपको बहुत परेशान कर सकता है।

अपने कांटेक्ट लिस्ट को कैसे बचा कर रखें

फोन के खोने पर भी आपको अपने कांटेक्ट नंबर मिल सके इसलिए यह रिकमेंट किया जाता है कि आप अपने सारे नंबर सिम या फोन के बजाय अपने गूगल अकाउंट में सेव करें जिससे आप उनका ऑनलाइन बैकअप ले सके।

वही आप अपने कांटेक्ट लिस्ट के सभी नंबर और उनसे जुड़े डिटेल तथा ईमेल आईडी आदि को प्रिंट करके उसका हार्ड कॉपी रख लें जिससे कि किसी सूरत में अगर आप इंटरनेट एक्सेस नहीं कर पाते हैं तो भी आपके पास एक ऑफलाइन कांटेक्ट का बैकअप रहे।

वैसे यह सर्विस से पूरी तरह से फ्री है और यह काम आप अपने कंप्यूटर और मोबाइल दोनों से कर सकते हैं।

अपने कांटेक्ट नंबर को गूगल पर कैसे सेव करे

सबसे पहले आपको ये ध्यान रखना होगा की आपके कांटेक्ट नंबर हमेसा सिम या फ़ोन के बजाये आपके गूगल अकाउंट में सेव हो।

कॉन्टेक्ट्स को गूगल खाते में सहेजें
कॉन्टेक्ट्स को गूगल खाते में सहेजें

आप जब भी कोई नया कॉन्टैक्ट नंबर सेव करे तो हमेसा ध्यान दे की ऊपर की तरफ लेफ्ट साइड में फ़ोन की जगह आपका गूगल अकाउंट सेलेक्ट रहे।

सर्च रिजल्ट में गूगल कॉन्टेक्ट्स
सर्च रिजल्ट में गूगल कॉन्टेक्ट्स

गूगल अकाउंट में सेव अपने कॉन्टेक्ट्स को देखने के लिए किसी भी ब्राउज़र में जाकर गूगल कॉन्टेक्ट्स सर्च करे। अब सर्च रिजल्ट में आये contacs.google.com लिंक पर क्लिक करे।

गूगल कॉन्टेक्ट्स डैशबोर्ड
गूगल कॉन्टेक्ट्स डैशबोर्ड

गूगल कॉन्टेक्ट्स लिंक को खोलते ही जिस गूगल आईडी से आपने ब्राउज़र में लॉगिन किया है, उस आईडी में सेव सभी कांटेक्ट नंबर आपको दिख जायेंगे। आप चाहे तो दाहिनी ओर ऊपर की तरफ क्लिक करके अपना गूगल अकाउंट चेंज कर सकते है तथा निचे की तरफ प्लस साइन पर क्लिक करके नया कांटेक्ट जोड़ सकते है।

वही अपने गूगल कॉन्टैक्ट की सेटिंग खोलने के लिए बायीं तरफ ऊपर की ओर बने तीन क्षैतिज लकीरो पर क्लिक करे।

गूगल कॉन्टेक्ट्स से अपने कांटेक्ट लिस्ट को कैसे डाउनलोड करे?

गूगल कॉन्टेक्ट्स की सेटिंग खोलते ही आपको अपने कॉन्टेक्ट्स नंबर की संख्या, अकसर संपर्क किए गए कॉन्टेक्ट्स, मर्ज & फिक्स तथा लेबल्स का ऑप्शन आएगा।

गूगल कॉन्टेक्ट्स की सेटिंग में प्रिंट का ऑप्शन
गूगल कॉन्टेक्ट्स की सेटिंग में प्रिंट का ऑप्शन

सेटिंग में और निचे आने पर आपको प्रिंट का ऑप्शन आएगा, जिसे क्लिक करके आप अपने पूरे कांटेक्ट लिस्ट को पीडीऍफ़ वर्जन में डाउनलोड कर सकते है, जिसे आप आसानी से प्रिंट कर सकते है। वैसे आप अगर आप कंप्यूटर के बजाये अपने मोबाइल के ब्राउज़र से अपने कांटेक्ट लिस्ट को प्रिंट करने की कोसिस करेंगे तो कुछ ही कांटेक्ट प्रिंट होंगे।

गूगल कॉन्टेक्ट्स से CSV या vCard फॉर्मेट में कांटेक्ट को एक्सपोर्ट करना
गूगल कॉन्टेक्ट्स से CSV या vCard फॉर्मेट में कांटेक्ट को एक्सपोर्ट करना

वैसे आप सेटिंग में एक्सपोर्ट का ऑप्शन सेलेक्ट करके अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट को गूगल या आउटलुक के csv फॉर्मेट या फिर ios डिवाइस के लिए vCard फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते है। यह ऑप्शन कंप्यूटर तथा मोबाइल दोनों के ब्राउज़र में काम करेगा।

CSV फाइल माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में खुलती है, जिसे आप एडिट और प्रिंट कर सकते है।

अपने फोन के कॉन्टेक्ट्स को गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप की मदद से मैनेज करना

आप अपने फोन के कॉन्टेक्ट्स को मैनेज करने और उसके ऑनलाइन बैकअप के लिए प्लेस्टोर से गूगल का कॉन्टेक्ट्स नाम का ऍप डाउनलोड कर सकते है।

प्ले स्टोर में गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप
प्ले स्टोर में गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप

गूगल का कॉन्टेक्ट्स ऍप गूगल पिक्सेल तथा स्टॉक एंड्राइड वाले स्मार्टफोन के कांटेक्ट लिस्ट को मैनेज करने के लिए बनाया गया है, जिसे अब किसी भी स्मार्टफोन में फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है।

गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप डैशबोर्ड
गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप डैशबोर्ड

गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप को खोलते ही ब्राउज़र डैशबोर्ड की तरह इसका भी डैशबोर्ड दिखेगा जिसमे आप गूगल अकाउंट को बदलने तथा नए कॉन्टैक्ट को सेव करने का ऑप्शन मिलेगा। इसमें सेटिंग्स के ऑप्शन के लिए बायीं ओर ऊपर की तरफ 3 क्षैतिज लकीरो पर क्लिक करे।

गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप में सेटिंग का ऑप्शन
गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप में सेटिंग का ऑप्शन

गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप के ऑप्शन को खोलते ही निचे की तरफ आपको सेटिंग का ऑप्शन दिखेगा जिसे आप क्लिक करे।

गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप सेटिंग
गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप सेटिंग

सेटिंग्स को खोलते ही आपको कुछ ऑप्शन दिखेगा जिसमे गूगल अकाउंट से कॉन्टेक्ट्स को रिस्टोर करने तथा अपरिचित/प्राइवेट नंबर को ब्लॉक करने का भी ऑप्शन है। आप इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट ऑप्शन के द्वारा अपने कांटेक्ट लिस्ट को .vsf फॉर्मेट में गूगल अकाउंट में अपलोड तथा डाउनलोड कर सकते है।

तो आप ऊपर बताई गयी प्रक्रिया का पालन करके अपने फ़ोन में मौजूद कॉन्टेक्ट्स लिस्ट को ऑनलाइन सुरक्षित कर सकते है तथा उसका प्रिंटआउट निकाल सकते है। इसके साथ ही गूगल कॉन्टेक्ट्स ऍप की मदद से अपने कॉन्टैक्ट नंबर्स को मैनेज भी कर सकते है।

स्मार्टफोन के फ़ॉन्ट और डिस्प्ले साइज को कैसे बढ़ाएं?

Smartphone का Font & Display साइज बढ़ाएं
Smartphone का Font & Display साइज बढ़ाएं

हम अपने स्मार्टफोन को इस्तेमाल करते हुए इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि उस में लिखे टेस्ट, एप आईकॉन या सेटिंग आदि को आसानी से समझ एवं पढ़ लेते हैं, लेकिन क्या यह सभी लोग कर सकते हैं?

जी नही, क्यंकि अभी भी बहुत से लोग स्मार्टफोन के साथ इतने कंफर्टेबल नहीं होते और उसमें लिखे टेक्स्ट को आसानी से पढ़ नहीं पाते है। ऐसे लोगों में खासकर बुजुर्ग या पेरेंट्स होते हैं जिन्हें स्मार्टफोन के छोटे टेक्स्ट एप आइकंस को देखने और उसमे न्यूज़ आदि को पढ़ने में काफी दिक्कत होती।

स्मार्टफोन को अपने मम्मी पापा दादा दादी या बुजुर्गो के लिए सुविधाजनक बनाये

जब हम कोई भी नया स्मार्टफोन खरीदते हैं तो उसका डिफॉल्ट फॉन्ट, टेस्ट और डिस्प्ले साइज काफी छोटा होता है, जिसे हम तो उसे आसानी से देख व समझ सकते हैं, लेकिन अधिकांश बड़े बुजुर्गों को इतने छोटे साइज के टेस्ट को पढ़ने में तथा छोटे आइकन को देखने में काफी ज्यादा दिक्कत होती है।

जिसकी वजह से वो स्मार्टफोन के साथ कंफर्टेबल ही नहीं हो पाते है और उन्हें अपना छोटा कीपैड वाला पुराना फ़ोन ही अच्छा लगता है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपके पैरेंट्स या ग्रैंड पेरेंट्स स्मार्टफोन को यूज़ करें और वह भी व्हाट्सएप ट्विटर, युटुब आदि का इस्तेमाल करें और समय के साथ अपडेट रहे तो आपको इसके लिए कोई स्पेशल टाइप का स्मार्टफोन खरीदने की जरूरत नहीं है।

बल्कि आप किसी भी स्मार्टफोन के फॉन्ट और डिस्प्ले में दिखने वाले टेक्स्ट आइकन आदि के साइज को बड़ा करके उनके देखने तथा पढ़ने लायक बना सकते हैं जिससे उन्हें स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना कंफर्टेबल लगे।

स्मार्टफोन के टेक्स्ट और आइकॉन के डिस्प्ले साइज को कैसे बड़ा करे?

वैसे यह सेटिंग हर स्मार्टफोन में अलग-अलग होती है लेकिन मैं इसे आपको ओप्पो वीवो जैसे कस्टम UI वाले स्मार्टफोन, सैमसंग के वन UI स्मार्टफोन तथा स्टॉक एंड्राइड वाले पुराने स्मार्टफोन में दिखाता हूं जिससे आपको अपने स्मार्टफोन में इसे कैसे करें इसका अंदाजा लग जाएगा।

ओप्पो वीवो रियलमी और श्याओमी आदि स्मार्टफोन्स के फॉन्ट और डिस्प्ले साइज को बड़ा करना

स्मार्टफोन की सेटिंग में डिस्प्ले & ब्राइटनेस का ऑप्शन
स्मार्टफोन की सेटिंग में डिस्प्ले & ब्राइटनेस का ऑप्शन

इन स्मार्टफोन्स में सबसे पहले आप फ़ोन की सेटिंग में जाए जिसमे आपको डिस्प्ले & ब्राइटनेस पर क्लिक करना है।

डिस्प्ले & ब्राइटनेस सेटिंग के अंदर फॉन्ट का ऑप्शन
डिस्प्ले & ब्राइटनेस सेटिंग के अंदर फॉन्ट का ऑप्शन

डिस्प्ले & ब्राइटनेस सेटिंग के अंदर फॉन्ट का ऑप्शन रहेगा जिसके अन्तर्गत फॉन्ट साइज और डिस्प्ले साइज दिया रहेगा, इन दोनो में ही आपको क्लिक करके सेटिंग करनी रहेगी।

फॉन्ट साइज स्केल
फॉन्ट साइज स्केल

फॉन्ट साइज के ऑप्शन पर क्लिक करने पर निचे की तरफ देखने पर साइज का स्केल दिया गया होगा, जोकि डिफ़ॉल्ट साइज पर सेट होगा। इस स्केल को आप अपने हिसाब से लार्ज या एक्स्ट्रा लार्ज पर सेट कर दे।

डिस्प्ले साइज स्केल
डिस्प्ले साइज स्केल

इसी तरह फॉन्ट के अंतर्गत डिस्प्ले साइज के ऑप्शन पर क्लिक करने पर निचे की तरफ देखने पर डिस्प्ले साइज का स्केल दिया गया होगा, जोकि डिफ़ॉल्ट साइज पर सेट होगा। इस स्केल को भी आप लार्ज पर सेट कर दे।

फॉन्ट के अंतर्गत फॉन्ट साइज तथा डिस्प्ले साइज की सेटिंग को मैक्सिमम पर करते ही, स्मार्टफोन के अंदर के टेक्स्ट, आइकॉन और फॉन्ट ये सभी साइज में बड़े हो जाएंगे।

सैमसंग स्मार्टफोन्स के फॉन्ट और डिस्प्ले साइज को बड़ा करना

सैमसंग स्मार्टफोन में इसके लिए खासतौर पर इजी मोड का ऑप्शन दिया गया है, जिसे ऑन करके आप स्मार्टफोन के टेक्स्ट, आइकॉन आदि को आकार में बड़ा कर सकते है।

सैमसंग स्मार्टफोन्स के सेटिंग में डिस्प्ले का ऑप्शन
सैमसंग स्मार्टफोन्स के सेटिंग में डिस्प्ले का ऑप्शन

सैमसंग स्मार्टफोन में आप सबसे पहले सेटिंग्स में जाकर डिस्प्ले ऑप्शन पर क्लिक करे

डिस्प्ले सेटिंग के अंतर्गत इजी मोड
डिस्प्ले सेटिंग के अंतर्गत इजी मोड

डिस्प्ले पर क्लिक करने पर कई ऑप्शन दिखेंगे, आपको पेज को स्क्रॉल करके निचे आना है और 'easy mode' पर क्लिक करना है।

इजी मोड
इजी मोड

'इजी मोड' के अंदर आपको एक स्लाइडिंग बटन दिखेगा। आप जैसे ही इस बटन को टच करेंगे इसका कलर ग्रीन हो जाएगा और आपके स्मार्टफोन के स्क्रीन के आइटम्स, होम स्क्रीन, आइकॉन साइज, कीबोर्ड और टेक्स्ट साइज आदि आकार में पहले से बड़े हो जाएंगे।

पुराने तथा स्टॉक एंड्राइड वाले स्मार्टफोन्स के फॉन्ट और डिस्प्ले साइज को बड़ा करना

सेटिंग्स के अंतर्गत एक्सेसिबिलिटी का ऑप्शन
सेटिंग्स के अंतर्गत एक्सेसिबिलिटी का ऑप्शन

स्टॉक एंड्राइड के पुराने वर्जन वाले स्मार्टफोन्स में यह ऑप्शंस एक्सेसिबिलिटी के अंतर्गत आता है, इसलिए सेटिंग में जाकर एक्सेसिबिलिटी पर क्लिक करे।

एक्सेसिबिलिटी के अंतर्गत फॉन्ट साइज और डिस्प्ले साइज का ऑप्शन
एक्सेसिबिलिटी के अंतर्गत फॉन्ट साइज और डिस्प्ले साइज का ऑप्शन

एक्सेसिबिलिटी पर क्लिक करते ही आपको फॉन्ट साइज और डिस्प्ले साइज का ऑप्शन दिखेगा। आपको फॉन्ट साइज को लार्जेस्ट तथा डिस्प्ले साइज को मैक्सिमम पर सेट करना होगा।

इस तरह से आप स्मार्टफोन को अपने पेरेंट्स ग्रैंड पेरेंट्स या उन सभी लोगों के लिए कंफर्टेबल बना सकते हैं जिन्हें छोटे टेक्स्ट या आइकॉन देखने में प्रॉब्लम होती है और वह स्मार्टफोन के छोटे से एरिया में टच नहीं कर पाते, वही इस सेटिंग से आपके स्मार्टफोन की स्क्रीन में दिखने वाली हर एक चीज बड़ी दिखेगी।

स्मार्टफोन कंपनियों के 5 झूठ जो आपकी आँखे खोल देगा

स्मार्टफोन कंपनियो के 5 झूठ जिसे सुनकर आपको गुस्सा आ जायेगा
स्मार्टफोन कंपनियो के 5 झूठ जिसे सुनकर आपको गुस्सा आ जायेगा

हम जैसे ही कोई नया स्मार्टफोन लेते हैं तो उसके कुछ महीने के बाद ही उसका अपडेटेड वर्जन आ जाता है और उस नए वर्जन में बहुत ही थोड़ा सा डिजाइन में चेंज करके तथा उसके हार्डवेयर और कैमरे में एकदम -माइनर सा अपडेट करके उसे इस तरीके से प्रजेंट किया जाता है कि अब उस नए फोन के सामने आपका पुराना स्मार्टफोन एकदम बेकार हो चुका है और ऐसा करके आपको नए स्मार्टफोन खरीदने के लिए उकसाया जाता है। वही इसके लिए कई बार कंपनियां flase advertisement भी करती है ।

स्मार्टफोन कंपनियों द्वारा अपने प्रोडक्ट्स का फर्जी एडवर्टाइजमेंट

Realme narzo30 के लॉन्च इवेंट में iphone का उपयोग
Realme narzo30 के लॉन्च इवेंट में iphone का उपयोग (Image credit: Realme/YouTube)

हाल ही में Realme द्वारा फर्जी बेंचमार्क स्कोर दिखाने की वजह से उसके फ्लैगशिप स्मार्टफोन GT 5G को antutu के द्वारा 3 महीने के लिए बैन कर दिया गया तथा तथा उसी के दूसरे स्मार्टफोन Narzo 30A के एक लांच इवेंट में गेम के डेमोंस्ट्रेशन के दौरान iPhone के इस्तेमाल किये जाने की वजह से कंपनी के फर्जी एडवर्टाइजमेंट की पोल खुल गयी है।

ऐसा ही नहीं कि सिर्फ एक कंपनी ने ऐसा किया बल्कि नोकिआ, सैमसंग, हुवाई तथा एप्पल जैसी स्मार्टफोन कंपनी भी false एडवरटाइजमेंट करती है और अपने प्रोडक्ट को बढ़ा चढ़ा करके दिखाती हैं, ताकि वह दूसरे कंपनी के बजाय अपने कंपनी के स्मार्टफोन को बेहतर दिखा सके तथा जिससे वे अपने स्मार्टफोन को खरीदने के लिए लोगो को मजबूर कर सकें।

5 ऐसी चीजे जिनके बारे में स्मार्टफोन कंपनियां गलत प्रचार करती हैं

वैसे तो बहोत सी चीजे है जो कम्पनिया अपने कस्टमर्स से छुपाती है, लेकिन हम उन 5 मुख्य चीजों के बारे में बात करते है जिनके बारे में स्मार्टफोन कंपनी अक्सर गलत प्रचार करती है:

1. स्मार्टफोन का कैमरा

तो उनमें से सबसे पहले आता है स्मार्टफोन का कैमरा जिसके बारे में सबसे अधिक भ्रम फैलाया जाता है, कंपनियां स्मार्टफोन के लांच के समय ऐसे-ऐसे फोटोस दिखाती हैं और उन फोटोज का टीवी पर प्रचार करती हैं कि,जैसे कि उनके स्मार्टफोन के कैमरे के सामने DSLR भी फेल है।

वही वह अपने 20-30 हजार के स्मार्टफोन के कैमरे को आईफोन या फिर पिक्सेल स्मार्टफोन के कैमरे से भी बेहतर दिखा देती है, लेकिन सच तो यह है कि यह सब अधिकांश झूठ होता है तथा प्रचार के दौरान कैमरा सैंपल में दिखाई जाने वाली यह फोटोस किसी डीएसएलआर कैमरे से क्लिक की गयी होती है, और यह किसी प्रोफेशनल फोटोग्राफर के द्वारा परफेक्ट वातावरण में ली जाती है जिससे वह अच्छी दिखे।

कंपनी अपने स्मार्टफोन के कैमरे से खींची गई रॉ फोटोस को नहीं दिखाती, बल्कि उसे काफी हैवी सॉफ्टवेयर की मदद से एडिट करके उसमें ढेरों फिल्टर लगाकर परफेक्ट बनवाती है तथा उसके बाद हमें दिखाती है। वहीं अगर आपने उस स्मार्टफोन को खरीद भी लिया तो भी आपको सालो लग जाएंगे लेकिन वैसी एक भी फोटो आप नही खींच पाएंगे।

Nokia Pureview faked ad
Nokia Pureview faked ad (Image credit: theverge.com)

वैसे ये ट्रेंड शुरू से चलता आया है जिसमें नोकिया लुमिया 920 से लेकर हवाई नोवा 3 जैसे स्मार्टफोन के एडवर्टाइजमेंट में, डीएसएलआर या किसी दूसरे स्मार्टफोन के कैमरे की फ़ोटो को इन स्मार्टफोन्स का बता कर प्रचार किया गया लेकिन किसी तरीके से लोगों ने इसे पकड़ लिया ।

2. स्मार्टफोन के प्रोसेसर और उसकी कैपेबिलिटी

अब दूसरा सबसे बड़ा झूठ बोला जाता है स्मार्टफोन के प्रोसेसर और उसकी कैपेबिलिटी को लेकर। तो मार्केट में जैसे ही नया प्रोसेसर आता है लगभग सभी कंपनी उसे लेकर अपना स्मार्टफोन लॉन्च करती है लेकिन वह इसे इतना ज्यादा हाईलाइट करती है कि जैसे इससे पहले का प्रोसेसर एकदम स्लो था और यह लेटेस्ट प्रोसेसर एकदम लाइट की स्पीड से वर्क करेगा।

लेकिन क्या सच में नया प्रोसेसर इतने तेज होते हैं, ऐसा नही है बल्कि जो भी नया प्रोसेसर लॉन्च होता है वह पुराने प्रोसेसर से महज कुछ मिली सेकंड ही तेज होता है जोकि हम नोटिसी नहीं कर सकते। पुराने प्रोसेसर भी नए प्रोसेसर की ही तरह सारे टास्क बहुत तेजी से कर सकते हैं और आपको चाहे गेम खेलना हो या कोई ऐप रन करना आपको कोई डिफरेंस समझ में ही नहीं आएगा।

हां यह डिफरेंस तब जरूर समझ में आएगा जब आप एक स्नैपड्रैगन 600 सीरीज को 700 सीरीज से या स्नैपड्रैगन 700 सीरीज को 800 सीरीज के प्रोसेसर से कंपेयर करेंगे क्योंकि इनका आर्किटेक्चर ही अलग है। लेकिन आप एक ही सीरीज में 2 या 3 जनरेशन जैसे कि स्नैपड्रैगन 845, 855 या 865 के बीच में तुलना करे तो आप परफॉर्मेंस के बेस पर डिफरेंस नहीं समझ पाएंगे, भले ही इनके बेंच मार्क का डिफरेन्स कितना भी ज्यादा क्यों ना हो।

3. स्मार्टफोन का डिस्प्ले

वही स्मार्टफोन में तीसरी सबसे अधिक गलत एडवर्टाइजमेंट किए जाने वाली चीज हैं उसका डिस्प्ले, जिसमें ना जाने कौन-कौन से टेक्नोलॉजी जैसे की रेटीना डिस्प्ले, सुपर अमोलेड, एलसीडी, OLED आदि आती है। ​इसमें कभी सेंटर में या कॉर्नर में notch देकर या डिस्प्ले को थोड़ा सा कर्व करके इसका इतना ज्यादा हाइप बनाया जाता है की इस डिस्प्ले के साथ यह स्मार्टफोन एकदम कूल लगेगा और उसमें देखने पर हमें कोई दूसरा ही दुनिया दिखेगी

वैसे हा डिस्प्ले की पीपीआई तथा hdr10 या एक्सडीआर जैसे टेक्नोलॉजी डिस्प्ले की क्वालिटी को बेटर बनाते हैं लेकिन डिस्प्ले के टाइप से इतना भी ज्यादा पिक्चर क्वालिटी पर फर्क नहीं पड़ता है और इतना ज्यादा तो बिल्कुल नहीं की जिसके लिए आप एकदम नया स्मार्टफोन खरीदे।

यहां तक की डिस्प्ले की रिफ्रेश रेट भी बहुत ज्यादा मैटर नहीं करता है और 120hz के डिस्प्ले वालों स्मार्टफोन के अंदर मैक्सिमम ट्रांजेक्शन एनिमेशन 60hz पर ही काम करते हैं। तो जब तक 4-5 साल ना हो जाए तबतक फ्लैगशिप स्मार्टफोन के डिस्प्ले में इस पीरियड्स में नए फोन के मुकाबले कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

यहां तक की कंपनियां डिस्प्ले को बेहतर दिखाने के लिए अपने एडवरटाइजमेंट में स्मार्टफोन के डिस्प्ले को कुछ ज्यादा ही कलरफुल और कर्व शेप में दिखाती है। ऐसा ही xiomi ने कुछ समय पहले अपने स्मार्टफोन के एडवरटाइजमेंट में किया जिसकी वजह से वह स्मार्टफोन कोई अलग ही मॉडल का दिखने लगा।

4. स्मार्टफोन से हेडफोन जैक को हटा देना

कंपनियों का चौथा झूठ है कि स्मार्टफोन में ज्यादा स्पेस बनाने के लिए हेडफोन जैक को हटा देना। एप्पल जैसे कंपनी ने 2017 में अपने स्मार्टफोन से हेडफोन जैक यह बोलकर हटा दिया कि इससे उसके अंदर इक्विपमेंट के लिए स्पेस बढ़ेगा, जिसके बाद कई और कंपनियो ने ऐसा करना शुरू कर दिया।

तो होता यह है कि शुरू से ही सभी कंपनी स्मार्टफोन के साथ ईरफ़ोन देती आई हैं और उसका पैसा फोन की एमआरपी से जोड़ कर लेती आई है, लेकिन ज्यादा प्रॉफिट कमाने के चक्कर में कंपनी ने ईयर फोन को ना देने के लिए सोचा लेकिन वह इतने से ही खुश नहीं हुए, वह इसी के साथ अपने वायरलेस एयर बर्ड्स और इयरफोंस को बेचने की जुगत में स्मार्टफोन से हेडफोन जैक को ही हटा दिए, जिससे कोई दूसरी कंपनी के वायर्ड इयरफोंस इनमें ना लगा सके।

कंपनियों ने इसके लिए बहाना क्या दिया की इससे स्पेस बचेगा, जबकि इसके इतने सालों बाद तक कई सारे फ्लैगशिप स्मार्टफोन 3.5mm जैक के साथ आ रहे और उनमे आज पहले से बहुत बेटर और नई टेक्नोलॉजी इस्तेमाल हो रही। साथ ही हैडफ़ोन जैक होते हुए भी इनमें से कई सारे स्मार्टफोन वाटरप्रूफ भी है।

5. ऑनलाइन फ्लैश सेल में स्मार्टफोन का आउट ऑफ स्टॉक होना

पांचवा झूठ फ्लैश सेल में स्मार्टफोन के आउट ऑफ स्टॉक होने का है। आपने कभी ऐसा सेल्स में पता चला है कि कितने स्मार्टफोन यूनिट इस सेल में बिकने वाले थे और उनमे से कितने बिके, नही ना क्योंकि यह कंपनी आपको कभी नहीं बताएगी।

देखिए अगर कोई छोटी मोटी कंपनी हो और उसके प्रोडक्ट खत्म हो जाये तो समझ में आता है, लेकिन फ़्लैश सेल में टॉप ब्रांड के स्मार्टफोन बिकते हैं, ये कंपनी एक बार में लाखों स्मार्टफोन यूनिट का प्रोडक्शन करती है, लेकिन इतने सारे स्मार्टफोन यूनिट ऐसे फ़्लैश सेल में मिनटों नहीं, बल्कि सेकंडों में ही बिक जाते हैं। तो यह जान लीजिए पूरी तरह फ्रॉड है और आप को बेवकूफ बनाया जाता है।

ऐसा कंपनी प्रोडक्ट की हाइप बनाने के लिए करती है और कुछ ही सेकंड में साइट को क्लोज कर के आपको लंबे टाइम तक वेट करने के लिए मजबूर करती है।

ये सारी चीजे यही ख़त्म नहीं होती

वैसे ऐसे बहुत सी चीजें जैसे कि रैम, फास्ट चार्जर, सिस्टम अपडेट,नॉन रिमूवल बैटरी जैसे बहुत ही चीजो के सिर्फ नंबर गेम में आपको उलझा कर नए स्मार्टफोन खरीदने के लिए स्मार्टफोन कंपनियां आपको उकसाती है।

वैसे अगर आप किसी मिड रेंज यह सस्ते स्मार्टफोन से हाईएंड स्मार्टफोन की और जा रहे हैं और उसमें अपग्रेड कर रहे हैं तो यह ठीक है, क्योंकि इसमें आपको बिल्कुल नया एक्सपीरियंस मिलेगा, लेकिन अगर आपके पास पहले से हाईएंड फ्लैगशिप स्मार्टफोन है और उसका कोई नया मॉडल आया हो तो आप उसे जरूर खरीदने से बचे।

क्योंकि आप 40-50 हजार लगाकर सिर्फ एक दो फीचर की वजह से नया मोबाइल ले भी लेंगे तो भी आपकी लाइफ में कोई वैल्यू ऐड नहीं होने वाली, बल्कि कुछ दिन में वह भी पुराना ही हो जाएगा। तो जब तक आपका अपना पुराना स्मार्टफोन काम कर रहा है और आपके सारे काम उसमें हो जा रहे तब तक उसी से काम चलाना ही समझदारी है वरना स्मार्टफोन कंपनी चाहती ही है कि आप हर साल उनका नया फोन ले जिससे उनकी कमाई बढ़े ।

स्मार्टफोन की लॉक स्क्रीन पर पावर बटन को कैसे निष्क्रिय करें?

चोर आपके स्मार्टफ़ोन को स्विच ऑफ नही कर पायेगा
चोर आपके स्मार्टफ़ोन को स्विच ऑफ नही कर पायेगा

अगर आपका फोन खो जाए तो आप उसे आसानी से गूगल फाइंड माय ऍप या फिर कंप्यूटर के ब्राउज़र में जाकर अपने गूगल अकाउंट के सिक्योरिटी ऑप्शन के जरिये उसे लोकेट कर सकते है। लेकिन मोबाइल के चोरी होने पर सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है की चोर उसे पाते ही स्विच ऑफ करके अपनी जेब मे रख लेता है जिसकी वजह से आपका मोबाइल लोकेट नहीं हो पाता है।

तो आपके स्मार्टफोन को कोई दूसरा व्यक्ति स्विच ऑफ ना कर पाए इसके लिए आप अपने स्मार्टफोन के पावर बटन को लॉक स्क्रीन पर निष्क्रिय कर दे, जिससे बिना लॉक खोले कोई भी आपके स्मार्टफोन को स्विच ऑफ नहीं कर पायेगा।

स्मार्टफोन के पावर बटन को लॉक स्क्रीन पर निष्क्रिय करने के फायदे

मैं कुछ साल पहले अपने साथ हुए एक वाकया को बताता हूं, उस टाइम मैं रात में बस में ट्रेवल कर रहा था और बस एक होटल में नाश्ते के लिए थोड़ी देर के लिए रुकी, तो मैं जैसे ही नास्ता करके वापस बस में वापस चढ़कर अपनी सीट तक पहुंचा, मुझे एहसास हुआ कि मेरे पॉकेट में मेरा स्मार्टफोन नहीं है।

तो मैंने देर ना करते हुए तुरंत बस को वही पर रुकवाया और अपने फ़ोन को ढूंढने लगा तथा एक दूसरे व्यक्ति से अपने फ़ोन पर कॉल करने को कहा और जैसे ही उसने मेरे नंबर पर कॉल किया मेरे फ़ोन में रिंग बजाने लगी और मुझे अपने फ़ोन की रिंगटोन बस के अंदर ही सुनाई देने लगी।

चूंकि मेरे फोन के पावर बटन में प्रॉब्लम थी और वह सही से काम नही करता था इसलिए चोर फ़ोन को तुरंत स्विच ऑफ नही कर पाया और मैं अपने फ़ोन को ढूंढ पाया। हा मैं हिंसा में विश्वास नही रखता इसलिए मैंने चोर की पिटाई नही की, लेकिन फोन की एक खराबी की वजह से मेरा स्मार्टफोन मुझे मिल गया इसलिए मैं बहोत खुश था।

अपने स्मार्टफोन के पॉवर बटन को डिसेबल कैसे करे?

वैसे आपको इसके लिए अपने स्मार्टफोन पावर बटन को ख़राब करने की जरूरत नही है, आपको इसके लिए अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में जाकर इसे कर सकते है जिससे कि अगर आपके स्मार्टफोन को कोई पाता है तो वह उसे तुरंत स्विच ऑफ ना कर सके तथा आपको अपने स्मार्टफोन को ढूंढने के लिए कुछ टाइम मिल जाये।

वैसे ये तरीका अभी सिर्फ एंड्राइड 10 और एंड्राइड 11 यूज़र्स के लिए ही है और इससे पहले के एंड्राइड वर्जन वाले स्मार्टफ़ोन में ये ऑप्शन नही आएगा। तो आइए जानते है इसे कैसे करे:

स्मार्टफोन की सेटिंग में साइड key या पावर बटन को सर्च करना
स्मार्टफोन की सेटिंग में साइड key या पावर बटन को सर्च करना

सबसे पहले आपको अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में जाकर पावर बटन अथवा side key सर्च करना होगा। उसके बाद उस सेटिंग में जाकर पावर बटन के फंक्शन में पावर मेनू की जगह वॉइस असिस्टेंट सेलेक्ट करना होगा।

वैसे इस प्रोसेस को स्टॉक एंड्राइड और कस्टम UI वाले स्मार्टफोन के लिए स्टेप बाई स्टेप करके दिखाता हूँ।

स्टॉक एंड्राइड वाले स्मार्टफोन में पावर बटन को डिसेबल करना

आप गूगल पिक्सेल, वनप्लस, नोकिआ, मोटोरोला जैसे स्टॉक एंड्राइड या फिर स्टॉक एंड्राइड से मिलते जुलते UI वाले स्मार्टफोन में ​इस तरह से पावर बटन को डिसेबल कर सकते है

सेटिंग में बटन्स & जेस्चर ऑप्शन
सेटिंग में बटन्स & जेस्चर ऑप्शन

सबसे पहले आप अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में जाकर बटन्स & जेस्चर पर क्लिक करे।

प्रेस & होल्ड द पावर बटन्स
प्रेस & होल्ड द पावर बटन्स

उसके बाद 'प्रेस & होल्ड द पावर बटन्स' पर क्लिक करे।

'प्रेस & होल्ड द पावर बटन्स' ऑप्शन के अंदर 'सेलेक्ट द फंक्शन'
'प्रेस & होल्ड द पावर बटन्स' ऑप्शन के अंदर 'सेलेक्ट द फंक्शन'

अब आपके सामने 'सेलेक्ट द फंक्शन' का ऑप्शन आएगा, जहाँ पर आप पावर मेनू की जगह वॉइस असिस्टेंट को सेलेक्ट करे।

ऐसा करते ही आपके स्मार्टफोन का पावर बटन दबाने पर पावर मेनू की जगह गूगल असिस्टेंट खुलेगा। मोबाइल को स्विच ऑफ करने या फिर रिस्टार्ट करने के लिए आप नोटिफिकेशन पैनल पर बने पावर ऑप्शन पर जा सकते है, लेकिन इसके लिए पहले आपको अपने स्मार्टफोन का लॉक खोलना होगा।

कस्टम UI वाले स्मार्टफोन में पावर बटन को डिसेबल करना

चूंकि हर स्मार्टफोन मैं यह सेटिंग अलग-अलग जगह पर होती है, तो मै कस्टम UI वाले स्मार्टफोन में से एक सैमसंग के वन UI वाले स्मार्टफोन की सेटिंग बताता हूँ:

सैमसंग स्मार्टफोन्स की सेटिंग में एडवांस्ड फीचर ऑप्शन
सैमसंग स्मार्टफोन्स की सेटिंग में एडवांस्ड फीचर ऑप्शन

सबसे पहले आपको स्मार्टफोन की सेटिंग खोलना होगा, जिसमे निचे आने पर आपको एडवांस्ड फीचर का ऑप्शन दिखेगा, जिसे आप टच करके खोले।

एडवांस्ड फीचर के अंदर 'साइड key' का ऑप्शन
एडवांस्ड फीचर के अंदर 'साइड key' का ऑप्शन

एडवांस्ड फीचर के अंदर सबसे ऊपर ही 'साइड key' का ऑप्शन है, इसे आपको खोलना है।

प्रेस & होल्ड का ऑप्शन
प्रेस & होल्ड का ऑप्शन

अब आपको प्रेस & होल्ड का ऑप्शन दिखेगा जिसमे आपको पावर ऑफ मेनू की जगह wake bixby को सेलेक्ट करना है।

ऐसा करते है पावर बटन से पावर मेनू का ऑप्शन हट जाएगा और उसकी जगह हर बार पावर बटन दबाने पर bixby ओपन होगा, जिसकी वजह से पावर बटन से स्मार्टफोन को स्विच ऑफ नहीं कर सकते।

वही यह तरीका भी फुलप्रूफ नहीं है और पावर तथा वॉल्यूम बटन के कॉन्बिनेशन से अभी भी फोन को स्विच ऑफ किया जा सकता है, लेकिन हां इमरजेंसी में यह आपको एक्स्ट्रा टाइम जरूर दे सकता है जिससे कि आपके मोबाइल के मिलने का चांस बढ़ जाता है।

वैसे मैं आपको एक टिप देता हूं जो बहोत काम की है, की हमेसा अपने लॉक स्क्रीन पर अपने घर का कोई अल्टरनेटिव नंबर लॉक स्क्रीन सेटिंग्स में जाकर जरूर लिखे जिससे कि एक्सीडेंट या फिर इमरजेंसी कंडीशन में कोई भी उस नंबर पे कांटेक्ट कर सके।

गूगल मैप के जरिये अपने फॅमिली तथा प्रियजनों की सटीक लोकेशन को कैसे जाने ?

गूगल मैप के जरिये परिवार की सटीक लोकेशन
गूगल मैप के जरिये परिवार की सटीक लोकेशन

आप बिना किसी के परमिशन के उसका लोकेशन नहीं देख सकते और अगर ऐसा करते है तो यह गलत है। लेकिन कुछ परिस्थिति ऐसी भी होती है जिसमे आपको तथा आपके प्रियजनों को एक दूसरे के लोकेशन को जानने से काफी सहूलियत होती है। जिसके लिए आप खुद उन्हें अपनी लोकेशन भेज सकते है।

अपने लोकेशन को अपनी फॅमिली को बताना तब और भी अच्छा फील कराता है जब हम ट्रेवल कर रहे हो और हमारे घर वाले फिक्रमंद होकर हमें बार-बार कॉल करके हमारी लोकेशन पूछ रहे हो।

फॅमिली के सदस्य या फिर पार्टनर को लोकेशन शेयर करने के फायदे

सोचिये की अगर आप रोज अपने घर के किसी सदस्य को पिकअप करने ऑटो या बस स्टैंड पर जाते हैं और वहां जाकर आपको काफी वेट करना पड़ता है, जिसकी वजह से आप बार-बार कॉल करके उसकी लोकेशन पूछते हैं। तो इससे अच्छा आप क्यों ना एक दूसरे को अपनी लोकेशन भेज दें जिससे आपको टाइम का सटीक अंदाज लग जायेगा, जिसकी वजह से आप अपने दूसरे काम को भी कर सकते है।

वैसे तो आप व्हाट्सएप पर भी किसी को अपना लोकेशन भेज सकते हैं लेकिन व्हाट्सएप पर लाइव लोकेशन की लिमिट महज 8 घंटे की है तथा इससे ज्यादा समय होने पर आपको दोबारा लोकेशन भेजनी पड़ेगी, तो इसके लिए सबसे बढ़िया तरीका गूगल मैप है।

गूगल मैप आपकी रियल टाइम हाई एक्यूरेसी लोकेशन को भेजेगा तथा आप इससे अपने हिसाब से घंटे या दिन या फिर जब तक आप इसे बंद ना कर दें तब तक की लोकेशन किसी को भेज या फिर देख सकते हैं ।

गूगल मैप से लोकेशन कैसे भेजे

गूगल मैप से लोकेशन भेजना काफी आसान है जिसके लिए आपको बस कुछ ही स्टेप्स को फॉलो करना होगा, तो आइये इस प्रोसेस को जानते है:

प्लेस्टोर पर गूगल मैप
प्लेस्टोर पर गूगल मैप

सबसे पहले आपको अपने स्मार्टफोन में गूगल ऍप खोलना होगा, जोकि सभी एंड्रॉइड स्मार्टफोन में इनबिल्ट रहता है। इसके साथ ही आप अपने स्मार्टफोन के नोटिफिकेशन पैनल से लोकेशन को भी ऑन कर ले।

गूगल मैप पर प्रोफाइल सेक्शन
गूगल मैप पर प्रोफाइल सेक्शन

2. जैसे ही आप गूगल मैप खोलेंगे आपकी लोकेशन मैप में दिखने लगेगी। अब आप मैप में स्क्रीन के दाहिनी ओर ऊपर की तरफ अपने प्रोफाइल पर क्लिक करे।

गूगल मैप सेटिंग्स
गूगल मैप सेटिंग्स

3. प्रोफाइल सेक्शन पर क्लिक करते ही आपके सामने कई सारे ऑप्शन दिखाई देंगे, जिनमे से आपको लोकेशन शेयरिंग ऑप्शन को खोलना है।

गूगल मैप का लोकेशन शेयरिंग पेज
गूगल मैप का लोकेशन शेयरिंग पेज

4. अब आपके सामने लोकेशन शेयरिंग का पेज आएगा, जिसमे आपको शेयर लोकेशन बटन पर क्लिक करना है।

शेयर योर रियल टाइम लोकेशन पेज
शेयर योर रियल टाइम लोकेशन पेज

5. शेयर लोकेशन पर क्लिक करते ही आपको शेयर योर रियल टाइम लोकेशन का पेज दिखेगा, जिसमे आपको सबसे पहले लोकेशन भेजने की अवधि सेट करनी रहेगी। आप इसमें 1 घंटे से लेकर 3 दिन तक समय सेट कर सकते है।

Until you turn this off option ऑप्शन
Until you turn this off option ऑप्शन

6. अगर आप चाहते है की आपका स्मार्टफोन हमेसा आपका लोकेशन भेजता रहे तो आप 'Until you turn this off' पर सेलेक्ट करे तथा उसके बाद निचे दाहिनी ओर 'More' पर क्लिक करे।

अपने कॉन्टैक्ट में लोकेशन शेयरिंग
अपने कॉन्टैक्ट में लोकेशन शेयरिंग

7. अब आप अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में से जिसे भी अपना लोकेशन शेयर करना चाहते है उसका नाम सर्च करके उसे सेलेक्ट कर ले, बस ध्यान रहे जिस कॉन्टैक्ट नंबर पर आप अपना लोकेशन भेजेंगे, उससे सामने वाले का गूगल अकाउंट भी जुड़ा रहे। वैसे आप सीधे गूगल या जीमेल आईडी भी डाल सकते है, इसके बाद आपको शेयर बटन पर क्लिक करना है।

रिफ्रेश लोकेशन & बैटरी परसेंटेज
रिफ्रेश लोकेशन & बैटरी परसेंटेज

8. अगर इस तरीके से आपको कोई अपना लोकेशन भेजता है तो आप उसके स्मार्टफोन की बैटरी परसेंटेज भी देख सकते है। अगर लोकेशन में थोड़ा डिले हो तो आप उसे रिफ्रेश करके रियल टाइम लोकेशन पा सकते है। वैसे इसे आप जब चाहे इसे कैंसिल कर सकते है।

वैसे ये तरीका बिल्कुल सेफ है और अगर कभी आपके समार्टफोन से बिना आपकी नॉलेज के किसी ने गूगल मैप के जरिये आपकी लोकेशनअपने स्मार्टफोन में भेजी है या फिर आप ही इसे बंद करना भूल गए है तो गूगल समय समय पर आपको मेल करके इसकी जानकारी देता रहेगा। जिससे आप इस लोकेशन शेयरिंग फीचर को जब चाहे बंद कर सकते है ।

अपने खोये हुए स्मार्टफोन को गूगल अकाउंट तथा गूगल फाइंड माय डिवाइस ऐप की मदद से कैसे ढूंढे

खोये हुए स्मार्टफोन को ढूंढे
खोये हुए स्मार्टफोन को ढूंढे

अपने स्मार्टफोन कि लोग बहुत केयर करते हैं लेकिन फिर भी कभी ना कभी लोगो से गलती हो ही जाती है और उनका स्मार्टफोन कहीं भूल जाने, खो जाने, साइलेंट मोड में होने या फिर चोरी हो जाने की वजह से वो उन्हें मिलता नही है।

ऐसी कंडीशन में अगर उसे ढूंढने का सही तरीका ना पता हो तो लोग अपने स्मार्टफोन से हाथ धो बैठते है तथा कोई दूसरा इंसान उसे पाकर उसका इस्तेमाल करने लगता है, वही इस बात की पूरी चांस होता है की वह व्यक्ति आपके फ़ोन में पड़ी आपकी पर्सनल फ़ोटो, वीडियो आदि का गलत इस्तेमाल कर सकता है।

अपने खोये हुए स्मार्टफोन को कैसे ढूंढे तथा उसके डाटा को डिलीट करे?

अगर आपका स्मार्टफोन खो गया है तो आप तुरंत अपने कंप्यूटर या फिर किसी परिचित के व्यक्ति के स्मार्टफोन के जरिए अपने डिवाइस की लोकेशन को देख सकते हैं तथा साइलेंट मोड होने पर भी उसमें रिंग कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आप चाहे तो अपने स्मार्टफोन के सारे डेटा को डिलीट करके उसे लॉक कर सकते हैं।

बस इसके लिए आपको अपने स्मार्टफोन में चल रहे गूगल अकाउंट की आईडी और पासवर्ड पता होनी चाहिए। वैसे इसे आप किसी भी स्मार्टफोन में गूगल के एक ऍप को इनस्टॉल करके भी कर सकते है, लेकिन मैं आपको सबसे पहले लैपटॉप या कंप्यूटर के जरिये ये सब कैसे करे जानते है, क्योंकि स्मार्टफोन के डेटा को डिलीट करने का ऑप्शन सिर्फ लैपटॉप या कंप्यूटर में ही आता है।

लैपटॉप/कप्यूटर के जरिये अपने स्मार्टफोन को ढूंढने अथवा उसका डाटा डिलीट करना

लैपटॉप/कप्यूटर में अपने स्मार्टफोन को ढूंढने के लिए आपको बस कुछ सिंपल स्टेप्स ही फॉलो करने होंगे जो इस प्रकार है:

ब्राउज़र में गूगल अकाउंट का सर्च रिजल्ट
ब्राउज़र में गूगल अकाउंट का सर्च रिजल्ट

  1. सबसे पहले कंप्यूटर के ब्राउज़र में गूगल अकाउंट सर्च करना होगा तथा उसके बाद सर्च रिजल्ट में सिर्फ गूगल अकाउंट के नाम से आने वाले रिजल्ट पर क्लिक करना होगा।

गो टू गूगल अकाउंट
गो टू गूगल अकाउंट

2. इसके बाद आपको इस तरह का इंटरफ़ेस दिखेगा जिसमे आपको ऊपर दाहिनी ओर लिखे 'गो टू गूगल अकाउंट' पर क्लिक करना होगा।

गूगल अकाउंट में sign in करे
गूगल अकाउंट में sign in करे

3. अब आपसे अपने गूगल अकाउंट में sign in के लिए कहा जाएगा। इसमें आप अपने खोये हुए स्मार्टफोन के गूगल अकाउंट का आईडी पासवर्ड डाले।

नोट: अगर आप किसी दूसरें के कम्प्यूटर में ये काम कर रहे और उसमे कोई दूसरा अकाउंट लॉग इन है, तो बेहतर होगा आप ये सारा प्रोसेस ब्राउज़र के incognite विंडो में करे

गूगल अकाउंट सिक्योरिटी ऑप्शंस
गूगल अकाउंट सिक्योरिटी ऑप्शंस

4. Sign in करते ही आपके गूगल अकाउंट का डैशबोर्ड खुल जाएगा, जिसमे आपको बायीं ओर के ऑप्शन में से सिक्योरिटी पर क्लिक करना है। सिक्योरिटी पर क्लिक करने के बाद आपको नीचे की तरफ स्क्रॉल करके 'योर डिवाइस' में आना है, जहाँ पर आपको अपने एकाउंट्स से कनेक्ट डिवाइस दिखाई देंगे।

'योर डिवाइस' में निचे की तरफ ''फाइंड योर लॉस्ट डिवाइस'' पर क्लिक करना है, जिसके बाद आपको अपने खोये हुए स्मार्टफोन को सेलेक्ट करना है।

गूगल फाइंड माय डिवाइस डैशबोर्ड
गूगल फाइंड माय डिवाइस डैशबोर्ड

5. आपके द्वारा अपने डिवाइस के नाम पर क्लिक करते ही इस तरह का डैशबोर्ड खुलकर आएगा जिसमे आपके डिवाइस की बैटरी तथा नेटवर्क इनफार्मेशन के साथ ही स्क्रीन पर ही दिए मैप में तत्कालीन लोकेशन दिखाने लगेगा।

इसमें बायीं ओर आपको तीन ऑप्शन मिलेंगे जिसमे सबसे पहला ऑप्शन डिवाइस में रिंग करने का है। इस ऑप्शन को क्लिक करने पर आपके डिवाइस में रिंग बजने लगेगी भले ही वो साइलेंट मोड में ही क्यों ना हो।

सिक्योर डिवाइस
सिक्योर डिवाइस

इसमें दूसरा ऑप्शन सिक्योर डिवाइस का है, जिसमे आपको डिवाइस को लॉक करने तथा लॉक स्क्रीन में कोई संदेश तथा रिकवरी फ़ोन नंबर डालने का ऑप्शन आता है। जिससे अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके स्मार्टफोन को पाता है तो उसे खोल ना सके तथास्मार्टफोन के डिस्प्ले पे दिए गए कांटेक्ट नंबर के जरिये वह आपसे संपर्क कर सके।

वही इसका तीसरा ऑप्शन 'इरेस डिवाइस' का है जिसमे आप अपने फ़ोन के सभी कंटेंट तथा डाटा को डिलीट कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे इस ऑप्शन को सेलेक्ट करने के बाद आपका डिवाइस आपके गूगल अकाउंट से भी sign out हो जाएगा जिसकी वजह से आप उसे दुबारा लोकेट नहीं कर पाएंगे।

नोट: 'इरेस डिवाइस' करने से सिर्फ आपके मोबाइल के इंटरनल स्टोरेज ही डिलीट होगा, यानी की अगर आपने अपने फोटो, वीडियो आदि एक्सटर्नल मेमोरी कार्ड में सेव कर रखा है तो वो डिलीट नहीं होगा।

अन्य स्मार्टफोन के जरिये अपने खोये हुए मोबाइल को ढूंढना

आप अपने स्मार्टफोन के क्रोम ब्राउज़र में जाकर भी ऊपर दिए गए प्रोसेस को कर सकते है, केवल उसमे 'इरेस डिवाइस' का ऑप्शन नहीं आएगा। वैसे इनसब काम के लिए गूगल का खुद का ऍप है और इसका फायदा यह है की आप चलते फिरते कभी भी अपने स्मार्टफोन के लोकेशन को ट्रेस कर सकते है।

गूगल फाइंड माय डिवाइस
गूगल फाइंड माय डिवाइस

  1. इसके लिए सबसे पहले आपको अपने स्मार्टफोन में प्ले स्टोर से 'गूगल फाइंड माय डिवाइस' एप्प डाउनलोड करना होगा।

गूगल फाइंड माय डिवाइस एप्प में sign in करे
गूगल फाइंड माय डिवाइस एप्प में sign in करे

2. गूगल फाइंड माय डिवाइस ऍप को खोलते ही आपको लॉगिन का ऑप्शन आएगा, जिसमे अगर आप किसी दूसरे के मोबाइल से अपने खोये हुए स्मार्टफोन की ढूँढना चाहते है तो 'sign in as a guest' पर क्लिक करे तथा अपने खोये हुए स्मार्टफोन के गूगल अकाउंट की आईडी पासवर्ड डालकर लॉगिन करे।

गूगल फाइंड माय डिवाइस एप्प डैशबोर्ड
गूगल फाइंड माय डिवाइस एप्प डैशबोर्ड

3. गूगल फाइंड माय डिवाइस एप्प में sign in करते ही एप्प का डैशबोर्ड खुल जाएगा जिसमे आपके डिवाइस का प्रेजेंट लोकेशन दिखाई देने लगेगा। इसमें आपको डिवाइस की बैटरी परसेंटेज, उसमे चल रहे नेटवर्क ऑपरेटर का नाम, उसकी सिग्नल स्ट्रेंथ तथा स्मार्टफोन के IMEI नंबर आदि की जानकारी मिलेगी।

इनसब के अलावा इस एप्प में आपको दो ऑप्शन मिलेंगे, जिसमे पहला ऑप्शन प्ले साउंड का है। इसके जरिये आप अपने स्मार्टफोन में रिंग कर सकते है, चाहे वह साइलेंट मोड में ही क्यों ना हो।

सिक्योर डिवाइस
सिक्योर डिवाइस

डेस्कटॉप की तरह इसमें भी 'सिक्योर डिवाइस' का ऑप्शन आता है जिसमे आप अपने मोबाइल को लॉक करके उसके लॉक स्क्रीन में अपना कोई मैसेज तथा मोबाइल नंबर छोड़ सकते है।

इस तरीके से आप अपने स्मार्टफोन को ट्रेस करने के साथ अपने डाटा को सिक्योर कर सकते है, लेकिन अगर आपका स्मार्टफोन गुम या फिर चोरी हो गया है तो उसकी पुलिस में कम्प्लेन जरूर करे। जिससे की अगर आपके स्मार्टफोन का कोई गलत इस्तेमाल होता है तो आपके मोबाइल के गुम होने की जानकारी पुलिस के पास पहले से रहे।

सभी UFS मेमोरी वर्जन की डिटेल्स तथा eUFS मेमोरी अन्य पोर्टेबल स्टोरेज से क्यों बेहतर है?

UFS तथा eUFS मेमोरी
UFS तथा eUFS मेमोरी

UFS स्टोरेज का मेन मकसद अल्ट्रा-पोर्टेबल पीसी, स्मार्टफोन, टेबलेट तथा एंबेडेड डिवाइस में एसडी कार्ड तथा eMMC स्टोरेज को रिप्लेस करना तथा पहले से कई गुना ज्यादा डाटा ट्रांसफर स्पीड, ज्यादा स्टोरेज और सिक्योरिटी प्रोवाइड करना है।

इसके साथ ही memory के द्वारा किये जाने वाले पावर की ख़पत को कम करके डिवाइस के बैटरी को बचाना है। वैसे UFS मेमोरी होता क्या है और यह कैसे दूसरे पोर्टेबल स्टोरेज से बेहतर है, तो आइये इसे जानते है।

मैनेज्ड मेमोरी क्या है और यह पोर्टेबल डिवाइस में किस तरह इस्तेमाल होता है ?

UFS, MMC तथा SD कार्ड्स एक तरह की managed मेमोरी है, यानी कि आप इन मेमोरी से किसी पार्टिकुलर डाटा जैसे कि किसी पिक्चर आदि को save या डिलीट कर सकते हैं, लेकिन वही अगर हम अनमैनेज्ड मेमोरी से किसी एक पर्टिकुलर डाटा को डिलीट करे तो पूरी मेमोरी ही फॉर्मेट हो जाती है।

तो जिस तरह कंप्यूटर तथा लैपटॉप में हार्ड ड्राइव तथा सॉलि़ड स्टेट ड्राइव जिसे शार्ट में HDD तथा SDD कहते हैं और यह मैनेज्ड परमानेंट मेमोरी होती है, उसी तरह स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच आदि के लिए UFS, MMC तथा SD memory आते है।

वही UFS तथा MMC जैसे non-volatile मेमोरी को गैजेट्स के अंदर, उसके सर्किट में सोल्ड कर के embaded कर दिया जाता है, जिससे यह उस डिवाइस में ROM की तरह वर्क करता है और डिवाइस के सर्किट बोर्ड में embaded होने की वजह से इनका नाम UFS तथा MMC से बदलकर eUFS तथा eMMC हो जाता है।

MMC मेमोरी का इस्तेमाल

MMC मेमोरी
MMC मेमोरी

MMC, यानी की मल्टीमीडिया कार्ड की तो इसे 1997 में unviel किया गया जो आज भी कैमरे में एक्सटर्नल सॉलिड स्टेट स्टोरेज के रूम में इस्तेमाल इस्तेमाल किया जाता है और अधिकांश कंप्यूटर में इसके लिए पोर्ट दिया रहता है। ।

यह एम्बेडेड फॉर्म में ROM के रूप में आज भी सस्ते स्मार्टफोन और गैजेट में इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे स्नैपड्रैगन 400 तथा 600 सीरीज, स्नैपड्रैगन 810, 820 और मीडियाटेक के अधिकांश प्रोसेसर के साथ आने वाले स्मार्टफोन्स में eMMC स्टोरेज का ही इस्तेमाल किया जाता है।

eMMC मेमोरी के फ़ीचर्स

eMMC हाफ डुप्लेक्स प्रोटोकोल पे काम करता है यानी कि इसमें एक बार मे एक ही आपरेशन हो सकता है और इसमे रीड और राइट एक साथ नही हो सकते, और यह सिंगल डायरेक्शन में ऑपरेट करता है।

eMMC 3.3 वोल्ट तक के पावर को consume करता है तथा अधिकतम 250 mb/s read तथा 125 mb/s की राइट स्पीड से डेटा ट्रांसफर कर सकता है, और इसमें एक सेकंड में 11000 से ज्यादा इनपुट/आउटपुट आपरेशन नही हो सकते है, वही यह सारे स्पेसिफिकेशन 2015 में लांच हुए लेटेस्ट eMMC 5.1 के हैं।

UFS मेमोरी की ज़रूरत क्यों पड़ी ?

eMMC मेमोरी को अपडेट करने तथा इससे ज्यादा डाटा ट्रांसफर स्पीड और IOPS छमता प्राप्त करने के लिए UFS टेक्नोलॉजी पर काम किया गया, जो कि फुल डुप्लेक्स प्रोटोकॉल पर काम करता है तथा बाय-डायरेक्शन ऑपरेशन करने में सक्षम है, जिसकी वजह से यह एक साथ एक ही टाइम में रीड/राइट आपरेशन कर सकता है।

UFS मेमोरी टेक्नोलॉजी भी दो प्रकार से इस्तेमाल की जाती है इसमें पहला as a मेमोरी कार्ड जिसमे UFS version 1.0, 1.1 और 2.0 आता है दूसरा एम्बेडेड मेमोरी जोकि eUFS version जिसमे 1.0, 1.1, 2.0, 2.1, 3.0 तथा इसका लेटेस्ट वर्जन 3.1 आता है।

वैसे हम UFS मेमोरी के वर्जन को जानने से पहले सबसे पहले सीक्‍वे᠎̮न्‌श्‌ल्‌ तथा रैंडम रीड/राइट स्पीड तथा सिंगल बैंडविड्थ तथा ड्यूल बैंडविड्थ के बारे में जान लेते है, क्यूंकि हर बार इन टर्म का उपयोग होगा।

सीक्‍वे᠎̮न्‌श्‌ल्‌ तथा रैंडम रीड/राइट स्पीड

सीक्‍वे᠎̮न्‌श्‌ल्‌ रीड/राइट स्पीड किसी बड़े फाइल या फोल्डर को एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर करने की स्पीड होती है। रैंडम रीड/राइट स्पीड में मेमोरी के अंदर 1 सेकंड में कितने इनपुट/आउटपुट ऑपरेशन को हैंडल करने की क्षमता है उसे कहते है और यह किसी सॉफ्टवेयर या एप्लीकेशन के इंस्टॉलेशन या उसे रन करते टाइम काम आती है।

सिंगल लेन बैंडविड्थ तथा ड्यूल लेन बैंडविड्थ

बैंडविथ मेमोरी के अधिकतम सैद्धांतिक डाटा ट्रांसफर की स्पीड को कहते है, वही सिंगल चैनल मेमोरी डाटा को सिर्फ एक डाटा चैनल से ट्रांसफर करता है, जबकि ड्यूल चैनल मेमोरी डाटा को 2 चैनल के जरिये ट्रांसफर करता है। यानी की अगर कोई मेमोरी एक चैनल से 64-बिट डाटा को ट्रांसफर करता है तो वो 2 चैनल के जरिये 128-बिट डाटा को ट्रांसफर करेगा।

आप इसे बिल्कुल इस तरह से समझ सकते है की आप अगर अपना माल एक गाडी के बदले 2 गाडी से भेजेंगे तो आप एक बार में ही दुगने माल की सप्लाई कर पाएंगे। इसी तरह डबल लेन बैंडविड्थ, सिंगल लेन बैंडविड्थ की तुलना में दुगनी गति से डाटा को ट्रांसफर करेगा।

UFS मेमोरी वर्जन्स

eUFS 3.1
eUFS 3.1 (image source: Samsung.com)

UFS मेमोरी पोर्टेबल गैजेट्स में एम्बेडेड रूप में इस्तेमाल हो रहे है, जिसे eUFS नाम से भी जाना जाता है और इनके अभी तक 6 वर्जन आ चुके है जोकि इस प्रकार है:

UFS 1.0

तो इनमे सबसे पहले 2011 में eUFS 1.0 आया जिसे UFS 1.0 के नाम से ही जाना जाता है, और ये 16, 32 तथा 64 GB के स्टोरेज ऑप्शन में आया, जिसकी सीक्‍वे᠎̮न्‌श्‌ल्‌ रीडिंग स्पीड 250 mb/s की तथा राइटिंग स्पीड 75 mb/s की थी वही इसकी रैंडम रीडिंग स्पीड 10000 IOPS तथा राइटिंग स्पीड 2500 IOPS तक थी।

UFS 1.1

UFS version 1.0 के जस्ट अगले साल इसका अपडेटेड वर्जन UFS 1.1 आया जिसमे कुछ इंप्रूवमेंट किए गए लेकिन यह दोनों वर्जन अभी किसी स्मार्टफोन में इस्तेमाल नहीं किए गए, वही यह सिंगल लेन के साथ आया जिसकी मैक्सिमम बैंडविथ 300 mb/s की थी।

UFS 2.0

सन् 2013 में यूएफएस 2.0 को लांच किया गया जोकि डबल लेन वाला मेमोरी था जिसके सिंगल लेन की बैंडविथ स्पीड 600 mb/s तथा डबल लेन बैंडविथ स्पीड 1200 mbps थी। UFS version 1.1 की तुलना में लिंक बैंडविथ के अलावा सिक्योरिटी फीचर्स एक्सटेंशन और एडिशनल पावर सेविंग फीचर्स आदि को जोड़ा गया।

वही इसे commercially सबसे पहले 2015 में सैमसंग ने अपने गैलेक्सी S6 स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया। यानी कि ये टेक्नोलॉजी महज 6 साल पहले आई और इसमें लगातार इंप्रूवमेंट हो रहे हैं।

UFS 2.1

इसके बाद 2016 में UFS version 2.0 में ही सिक्योरिटी को इंप्रूव किया गया तथा इंक्लाइंड क्रिप्टोग्राफिक ऑपरेशन को ऐड किया गया, और UFS वर्जन 2.1 के नाम से इंट्रोड्यूस किया गया तथा UFS 2.1 आज भी अधिकांश मिड रेंज स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जा रहा है ।

UFS 3.0

2018 में यूएसएस टेक्नॉलोजी में वर्जन 3.0 के साथ मेजर इम्प्रूवमेंट हुआ और इसकी स्पीड कई गुना बढ़ गई। UFS 3.0 में सीक्‍वे᠎̮न्‌श्‌ल्‌ रीड स्पीड 2.1 Gb/s तथा राइट स्पीड 410 mb/s हो गयी, वही इसकी एप्लीकेशन तथा गेमिंग को हैंडल करने वाली रेंडम रीड स्पीड 68000 IOPS तथा रैंडम राइट स्पीड 63000 IOPS पहुँच गयी।

इसके सिंगल लेन की बैंडविड्थ 1450 mb/s, वही इसके दोनों लेन की बैंडविड्थ मिला कर देखे तो 2.9Gb/s की स्पीड हो गयी, जिससे कि इसकी वजह से गैजेट्स की गेमिंग परफॉरमेंस काफी अच्छी हो गयी।

UFS 3.1

UFS का सबसे लेटेस्ट वर्जन 3.1, साल 2020 में आया जिसमे बैंडविड्थ तथा नंबर ऑफ लेन अपने पुराने version 3.0 के बराबर ही रहा लेकिन इसमें राइट बूस्टर को ऐड किया गया जिससे इसकी राइट स्पीड बढ़ गई।

इसमे परफॉर्मेंस थ्रोटलिंग नोटिफिकेशन को भी जोड़ा गया जिससे यह होस्ट को ओवर टेंपरेचर की स्थिति में परफॉर्मेंस के कम होने की जानकारी देता है, तथा इसके साथ ही इस version में आइडियल मोड आदि भी ऐड किया गया है।

UFS स्टोरेज की मैक्सिमम कैपेसिटी 16 TB तक होती है तथा यह 0.2 वोल्ट से 0.4 वोल्टस तक के बीच मे पावर consumption करता है, यानी कि UFS स्टोरेज हर मामले में eMMC स्टोरेज की comprision में सुपीरियर है।

UFS मेमोरी का स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल

UFS मेमोरी का स्मार्टफोन में इस्तेमाल की बात करे तो UFS version 2.0 स्नैपड्रैगन 820, 821, kririn 950, 955 तथा Samsung के एक्सिनोस 7420 प्रोसेसर्स के साथ आने वाले स्मार्टफोन के साथ कंपेटबले रहे है और इनके साथ इम्पलीमेंट किये गए।

UFS 2.1 स्नैपड्रैगन 700 सीरीज तथा स्नैपड्रैगन 835 से लेकर 850 के बीच वाले प्रोसेसर्स, किरिन 960,970 तथा एक्सिनोस 9609, 9610, 9611, 9810 तथा 990 के अलावा मीडियाटेक G90 processors के साथ इम्पलेमेंट किया गया।

UFS वर्जन 3.0 स्नैपड्रैगन 855 और 865 प्रोसेसर्स के अलावा, एक्सिनोस 9820/9825 तथा किरिन 990 वाले प्रोसेसर्स के साथ इम्पलेमेंट किया गया है तथा इसे स्नैपड्रैगन के पुराने 835 तथा 845 प्रोसेसर भी इसे सपोर्ट करते है।

"UFS 3.0 के साथ आने वाला पहला स्मार्टफोन वनप्लस 7 तथा वनप्लस 7 प्रो था तथा यह स्मार्टफोन सबसे पहले स्नैपड्रेगन 855 के साथ लांच हुए थे।"

लेटेस्ट यूएफएस 3.1 की बात करें तो यह स्नैपड्रेगन 865 और 888 के साथ इंप्लीमेंट किए गए हैं तथा भविष्य के प्रोसेसर्स के साथ आएंगे।

UFS फ़्लैश स्टोरेज

eUFS के अलावा UFS मेमोरी कार्ड भी आते हैं जिन्हें सैमसंग ने 2016 में अनाउंस किया है जो कि सिंगल बैंडविथ को सपोर्ट करते हैं। यूएफएस मेमोरी कार्ड वर्जन 1.0 तथा 1.1 की मैक्सिमम बैंडविड्थ स्पीड 600 mb/s तथा 2018 में इंट्रोड्यूस हुए वर्जन 2.0 की मैक्सिमम बैंडविड्थ स्पीड 1.2 Gb/s है।

अभी के स्मार्टफोन में UFS मेमोरी कार्ड सपोर्ट नही करते लेकिन शायद यह हमे सैमसंग के लेटेस्ट फ्लैगशिप स्मार्टफोन में जल्द ही देखने को मिलेंगे।

कैसे Esports को बाकी पॉपुलर स्पोर्ट्स की तरह ही ट्रीट किया जाने वाला है

अब बच्चे स्कूल में वीडियो गेम्स खेलेंगे
अब बच्चे स्कूल में वीडियो गेम्स खेलेंगे

बचपन में किसे गेम खेलना पसंद नहीं होता है और उसमे भी वीडियो गेम्स की तो अलग ही एक दुनिया है, जिसे अगर इसे बच्चों को खेलने दिया जाए तो वह सब कुछ भूल कर इसी में लगे रहेंगे।

लेकिन क्या आपको पता है जो वीडियो गेम सिर्फ हमारे इंटरटेनमेंट का जरिया था वह अब एक कैरियर भी बन सकता है और 2022 में होने वाले एशियन गेम्स में esports यानी कि इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स को भी शामिल किया गया है, जिसमे भारत की इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (ESFI) भी शामिल है।

वर्तमान में Esports की स्थिति

टेक्नोलॉजी की मदद से ही वीडियो गेम आज इतने इवॉल्व हो गए हैं कि हम अपने घर पर बैठे-बैठे ही दुनिया भर के लोगों से गेम में compete कर सकते हैं और वीडियो गेम की वर्चुअल दुनिया का मजा ले सकते हैं, लेकिन अब esport को ग्लोबली एक स्पोर्ट का दर्जा मिल रहा है।

Esport टूर्नामेंट भी क्रिकेट तथा फुटबॉल मैच की तरह बड़े से स्टेडियम में आयोजित किये जा रहे है, जहां पर लाखों दर्शक इसे स्टेडियम में बैठकर तथा ऑनलाइन और टीवी आदि पर इसे देखते है । वही esport के लिए डेडिकेटेड esport टीवी चैनल्स भी है जिसमे सिर्फ esport इवेंट्स दिखाई देते है, तथा इसके प्रो-प्लेयर करोड़ों में earn करते हैं और इन टूर्नामेंट के इनाम की राशि भी करोड़ों में ही होती है।

Esport प्लेयर बनकर आप कितना कमा सकते है ?

अगर आप प्रो प्लेयर बन गए तो 2020 में हुए कुछ esport टूर्नामेंट जैसे कि लीग आफ लीजेंड्स और फोर्टनाइट की इनामी राशि 9 मिलीयन डॉलर्स यानी कि लगभग 64 करोड़ रुपए थी तथा वही काउंटर स्ट्राइक के ग्लोबल इवेंट में तो यह प्राइज मनी 15 मिलियन डॉलर यानी कि लगभग 110 करोड रुपए के करीब थी।

वही इसमें पार्टिसिपेट करने वाली टॉप 10 टीमों को भी अच्छे खासे प्रायोजक मिल जाते हैं जिनसे उन्हें करोड़ों रुपए का इंडोर्समेंट मिलता है।

मान लीजिए आप ठीक-ठाक गेम खेलते हैं और एक प्रो लीग में नही भी पहुँच पाए लेकिन आप लगातार गेम खेल रहे हैं तो कोई छोटी गेमिंग कंपनी आपको जरूर स्पॉन्सर करेगी जिससे आप लगभग 50000 रुपये से डेढ़ लाख रुपए तक हर महीने कमा सकते हैं। यानी कि पैसे के मामले में इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स किसी भी स्पोर्ट की तुलना में कम नही है।

इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स (esports) का भविष्य

Esport अब मिलियन डॉलर इंडस्ट्री बन चुकी है उसे अब 2024 में पेरिस में होने वाले ओलंपिक में भी शामिल करने का प्लान बनाया जा रहा है।

OCA - AESF Exclusive पार्टनरशिप एग्रीमेंट
OCA - AESF Exclusive पार्टनरशिप एग्रीमेंट

वही 2022 में चाइना के ग्वांगझोउ शहर में होने वाले एशियन गेम्स में esports को शामिल कर लिया गया है जिसमें ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया भी पार्टनर है जिसमे भारत की ESFI भी सदस्य हैं।

चुकी अब esport को एक ऑफिशियल स्पोर्ट का दर्जा मिल रहा है और इसकी पॉपुलैरिटी भी बहुत तेजी से बढ़ रही है तथा इसके साथ ही भविष्य में इसमें और भी कई टेक्निकल एडवांसमेंट होंगे, इसलिए इसे जल्द ही as a sport प्रमोट किया जाएगा और इसके साथ ही इसे स्कूलों में भी अन्य स्पोर्ट्स के साथ एक्स्ट्रा सर्कुलर एक्टिविटीज में शामिल किया जाएगा।

यानी कि अब भविष्य में बच्चों को स्कूल में वीडियो गेम्स खेलना भी सिखाया जाएगा और उन्हें esport टूर्नामेंट के लिए ट्रेन किया जाएगा।

भारत में esport की शुरुआत

वैसे भारत में ज्यादातर लोगो ने esport का पहला एक्सपीरियंस pubg मोबाइल से ही किया है और लोगों ने इसे काफी पसंद भी किया, वहीं Pubg ने कई esport टूर्नामेंट भी आयोजित करवाए हैं।

लेकिन अभी pubg के बैन होने के बाद भी आप बहुत सारे मल्टीप्लेयर गेम जैसे कि Free fire, call of duty, League of legends, Dota 2, Overwatch, valorent, Heros of storm, fortnight, Counter strike आदि availabe है, जिन्हें आप खेल सकते है तथा इन गेम्स के द्वारा esport टूर्नामेंट्स में भाग ले सकते है।

चूंकि esport टूर्नामेंट genrally टीम के साथ ही खेला जाता है इसलिए अभी इन टूर्नामेंट्स में अभी सिर्फ मल्टीप्लेयर गेम्स को ही शामिल किया जा रहा है, जिसमे आप अपने दोस्तों के साथ एक टीम बनाकर इन टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट कर सकते हैं। वैसे इन टूर्नामेंट के अलावा आप यूट्यूब पर भी अपना खुद का गेमिंग चैनल बना सकते हैं और भारत में मोर्टल और डायनेमो जैसे यूट्यूब गेमिंग चैनल्स लाखों में कमा रहे हैं और इनकी नेट इनकम भी करोड़ों में पहुंच चुकी है।

तो अगर आपको भी गेम्स का शौक है तो आप भी इसमें अपना कैरियर बना सकते हैं, हां बाकी फील्ड की तरह इसमें भी आपको बहोत आसानी से कुछ नही मिलेगा और आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी लेकिन यह मेहनत काफी मजेदार हैं।

डिजिटल हेल्थ कैसे हमारे भविष्य में क्रांति लाएगा?

वन पर्सन वन मेडिकल रिकॉर्ड
वन पर्सन वन मेडिकल रिकॉर्ड

अभी तक आपने दो प्रकार के हेल्थ केयर सिस्टम प्राइवेट हेल्थ केयर और पब्लिक हेल्थ केयर सिस्टम के बारे में जानते होंगे लेकिन अब आने वाले समय में डिजिटल हेल्थ भी कॉमन होगा। चूंकि हेल्थ एक बहुत ही पर्सनलाइज्ड मैटर है और हर एक इंडिविजुअल पर्सन के हिसाब से उसका अलग ट्रीटमेंट होता है इसलिए भविष्य में डिजिटल हेल्थ की मदद से हर एक इंसान का सटीक इलाज किया जाएगा।

मैं आपसे डिजिटल हेल्थ के बारे में बात कर रहा हूं और इसकी मदद से हेल्थकेयर कैसे बेहतर बनाया जाएगा और आने समय में कैसे इसकी मदद से मेडिकल ट्रीटमेंट में मदद मिलेगी ।

डिजिटल हेल्थ काम कैसे करेगा ?

सोचिए अगर आप डॉक्टर के पास जाते हैं और आप अपनी मेडिकल हिस्ट्री का आईडी उसे बताते हैं तो वह अपने कंप्यूटर में आपके तथा आपकी फैमिली की पूरी मेडिकल हिस्ट्री को देख सकेगा तथा आपकी डेली एक्टिविटी कैसी है, आपकी हार्टबीट नॉर्मल रही है या नहीं या फिर आपके बॉडी का टेंपरेचर कब ज्यादा रहा वह सभी चीजों को देख सकेगा।

वही आपकी मेडिकल हिस्ट्री से आपको कब कौन सी बीमारी हुई है और आपको उस समय किस दवा का कैसा प्रभाव हुआ तथा आपको बचपन में किस चीज की वैक्सीन लगी है यह सभी चीजें उसे पता चल जाएंगी। तो होगा यह कि इस डेटा की मदद से डॉक्टर आप की बीमारी को जल्दी पकड़ लेगा और सही इलाज कर पायेगा।

चूँकि किसी की भी मेडिकल हिस्ट्री उसके इलाज के लिए बहोत इम्पोर्टेन्ट होती है और इसके आधार पे ही हर individual इंसान के हिसाब से अलग दवा बनाई जा सकती है, जिससे आप बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे।

डिजिटल हेल्थ है क्या?

डिजिटल हेल्थ आपकी हेल्थ, हेल्थ केयर, लिविंग सोसाइटी आदि को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़कर मोबाइल हेल्थ, हेल्थ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, टेलीहैल्थ, टेलीमेडिसिन आदि की मदद से आपको पर्सनलाइज्ड मेडिसिन और उपचार उपलब्ध कराएगा।

भविष्य मे डिजिटल हेल्थ वन पर्सन, वन हेल्थ रिकॉर्ड के बेस पर काम करेगा जिसमें हर एक इंसान का एक अलग रिकॉर्ड होगा जिसे नेशनल हेल्थ केयर सिस्टम से जोड़ा जाएगा तथा साथ ही इस डाटा को क्लिनिकल रिसर्च में भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे की आपके लिए इफेक्टिव तरीके से दवा बनाई जा सके।

तो होता यह है कि जब आपकी तबीयत खराब होती है तो आप डॉक्टर के पास जाते हैं और चुकी डॉक्टर को आपके पास्ट मेडिकल रिकॉर्ड और बॉडी छमता या इम्युनिटी के बारे में पता नहीं होता इसलिए वह ढेर सारे टेस्ट लिख देता है तथा उन टेस्ट के कारण जो बीमारी डॉक्टर को समझ में आती है, उस हिसाब से आपको दवा देता है ।

वही हर इंसान में एक ही दवा अलग-अलग तरीके से इफेक्ट करती है और सभी लोगों में एक जैसी इफेक्टिव नहीं होती वही इस तरीके में काफी टाइम और पैसे भी लगते हैं।

वन पर्सन वन मेडिकल रिकॉर्ड का क्या मतलब है

अभी हम personalised दवा के बारे में हम सोच भी नही सकते, इसलिए भविष्य में डिजिटल हेल्थ को अपनाने की शुरुआत की जा रही है जिसमें किसी इंसान के पैदा होने से लेकर मरने तक का एक रिकॉर्ड होगा और उसमें उसकी हेल्थ का पूरा डाटा रहेगा।

जिसमें उसे कब वैक्सीन लगी कब वह बीमार हुआ और उसके ऊपर कौन सी दवा का कैसा असर रहा आदि के साथ कही उसे किसी चीज से एलर्जी तो नहीं या फिर उसकी फैमिली में कोई ऐसी जेनेटिक बीमारी तो नहीं जो उसे फ्यूचर में हो सकती है आदि सभी जानकारिओं का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा।

डिजिटल हेल्थ के अंतर्गत आप जिस भी हॉस्पिटल में अपना इलाज कर आएगा, वह हॉस्पिटल आपके मेडिकल डाटा में इंट्री करता रहेगा और प्रेजेंट के ट्रीटमेंट को उसमें अपडेट करेगा। वही यह डाटा आपके स्मार्टफोन या पहने गए स्मार्ट वॉच के द्वारा भी अपडेट होता रहेगा और आप कितना सोए और आपने कितनी एक्सरसाइज की यह सब मेजर करके आपके मेडिकल हिस्ट्री में फीड करता रहेगा।

यह सारा प्रोसेस A.I. बेस्ट होगा, जिसकी वजह से अगर आपके बॉडी में कुछ अनयूजुअल एक्टिविटी होने पर जैसे कि लगातार स्ट्रेस में रहने पर हाई पल्स को डिटेक्ट करके आप को मॉनिटर किया जाएगा और आप को हार्ट अटैक होने से पहले ही आप को एलर्ट कर दिया जाएगा, जिससे कि आप अवेयर हो जाए और टाइम पर डॉक्टर से कंसल्ट कर सके। क्योंकि आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक जगह पर होगी तो डॉक्टर को ज्यादा टाइम नहीं लगेगा और आपके हिसाब से पर्सनलाइज्ड इलाज शुरु कर देगा।

डिजिटल हेल्थ के कार्यान्वयन टेस्ट का रिजल्ट कैसा रहा

डिजिटल हेल्थ की शुरुआत अफ़्रीका के कुछ जगहों पर करके देखी गई जहां पर बच्चे के पैदा होते ही उनके हेल्थ रिकॉर्ड को एक जगह पर स्टोर किया गया तथा बच्चे को कब किस चीज का टीका लगना है उनके पेरेंट्स को मैसेज करके बताया गया तथा इसके साथ ही स्मार्ट बैंड के जरिए उनकी नींद और बीपीएम को लगातार मॉनिटर किया गया।

वही किसी परेशानी के होने पर उनके पेरेंट्स वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टर से कंसल्ट करके सही नॉलेज ले सके और डॉक्टर भी उस हेल्थ रिकॉर्ड की मदद से उन्हें सही प्रिसक्रिप्शन दे सके। तो इन सब प्रोसेस से एक तो पेरेंट्स की हेडेक कम हुई थक उन्हें भागदौड़ भी कम करनी पड़ी, वही उनके पैसे भी बचे ।

तो ऐसे ही डिजिटल हेल्थ के अंतर्गत आपको एक्सरसाइज करने अच्छी नींद लेने तथा स्ट्रेस कम करने आदि में आपकी हेल्प की जाएगी तथा आपका सारा मेडिकल हिस्ट्री का एक जगह डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिसकी मदद से आपके इम्यूनिटी और बॉडी के हिसाब से आपके लिए व्यक्तिगत दवाई बनाई जाएंगी तथा आपका इसी मेडिकल रिकॉर्ड के हिसाब से आपका मेडिकल ट्रीटमेंट भी किया जाएगा।

कैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (iot) हमारे भविष्य को शानदार बनाने जा रहा है

हमारा फ्यूचर इतना शानदार होने वाला है
हमारा फ्यूचर इतना शानदार होने वाला है

इंटरनेट ने दुनिया के सभी लोगों को आपस में जोड़ दिया है तो हम इसके जरिए कई सारी जानकारी फाइलें फोटो और वीडियो दूसरे लोगों तक घर बैठे बैठे भेज सकते हैं तथा वीडियो कॉल के जरिए उनसे लाइव कन्वर्सेशन भी कर सकते हैं।

लेकिन जो इंटरनेट अभी तक सिर्फ इंसानों के लिए था अब भविष्य में यह हमारी चीजों से भी जुड़ेगा और हमारे लाइफस्टाइल को और बेहतर बनाएगा। हम इंटरनेट ऑफ थिंग्स (iot) के बारे में बात कर रहे हैं और इसकी वजह से हमारा भविष्य किस तरह से शानदार हो रहा है।

इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को कैसे बदला

अभी इंटरनेट को हमारे देश में आए हुए लगभग 26 साल हो गए हैं और इसकी वजह से हमारी लाइफ स्टाइल कम्युनिकेशन और बिजनेस काफी बेहतर हुई है, वैसे इसके कुछ बुरे इफेक्ट है भी है जैसे कि सोशल मीडिया एडिक्शन या ओवर इंटरटेनमेंट, लेकिन हम इन सब को छोड़ दें तो हम इंटरनेट की वजह से काफी स्मार्ट हो गए हैं और इसके मदद से हम अपने घर के कुछ उपकरण जो कि इंटरनेट से जुड़े हैं उन्हें कंट्रोल कर सकते हैं।

मै बात कर रहा हूं आईओटी यानी कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स कि जिसमें आपके घर के बहुत सारे उपकरण खुद ही सिचुएशन को observe करेंगे तथा उस सिचुएशन के अकॉर्डिंग एक्ट करेंगे तथा उन स्थिति में जहां आपकी पसंद का मामला हो आप की परमिशन लेंगे।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (iot) करता क्या है ?

मान लीजिए आप घर के बाहर चले गए हैं तथा आप अपने घर को लॉक करना भूल गए हैं और साथ ही घर में गीजर, एसी, लाइट, टीवी आदि को बंद करना भूल गए तो आपका घर यह खुद ही सेंस कर लेगा कि आपके घर में कोई नहीं है और खुद ही सारी चीजों को बंद कर देगा तथा आपके स्मार्टफोन में नोटिफिकेशन भेज देगा।

iot
iot

और आपको जब भी जरूरत होगी आप सभी चीजों को स्मार्टफोन से दोबारा ऑन कर लेंगे और घर का लॉक अपने स्मार्टफोन से ही खोल सकेंगे।

अब दूसरे परिदृश्य में आते है जिसमे अगर आप घर पर हैं और आप टीवी देखते देखते सो गए, तो आपका घर आपके द्वारा पहने गए स्मार्ट बैंड या फिर कैमरे की मदद से समझ जाएगा और टीवी को बंद कर देगा तथा घर में जल रही अनावस्यक लाइट्स को भी बंद कर देगा। वही आपके रूम का टेंपरेचर भी आप के अनुरूप मेंटेन रहेगा जिसकी वजह से आपको नींद से उठ कर एसी के टेंपरेचर को कम या ज्यादा नहीं करना पड़ेगा।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (iot) के लाइफ सेविंग बेनिफिट्स

बात करें iot के लाइफ सेविंग बेनिफिट्स की तो तो मान लीजिए रात के 3:00 बजे हैं और आपकी तबीयत अचानक से बिगड़ रही है और इसी बीच आप को दिल का दौरा पड़ गया और आपके घर में iot है, तो आपके पहने हुए स्मार्ट बैंड / स्मार्ट वॉच, अथवा किसी अन्य सेंसर के मदद से आपका घर आपके हार्टबीट तथा बॉडी में हो रही अनयूजुअल एक्टिविटी को डिटेक्ट कर लेगा और इन सारी डिटेल्स को पास के हॉस्पिटल में भेज देगा।

इसके साथ ही iot की मदद से आपका घर खुद ही हॉस्पिटल को अलर्ट करेगा और उसके साथ ही आपके शुभचिंतकों के पास भी खबर पहुंचा देगा जिससे ज्यादा देर ना करके हॉस्पिटल वाले आपके घर पर एंबुलेंस भेज देंगे और जिससे आपकी जान बच सकती है।

वही ऐसा ही सेम टेक्नोलॉजी आपके घर की सभी चीजों जैसे कि स्मार्टबैंड, कैमरा आदि मैं इंप्लीमेंट रहेगी और अगर आपके घर में कोई चोर घुसा या फिर आपकी गाड़ी का कही पर एक्सीडेंट हो जाती है या फिर आपके घर में आग लग जाती है तो यह उपकरण iot से जुड़े होने की वजह से पुलिस स्टेशन, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस आदि को खबर भेज देंगे और और ये सभी चीजें उस इलाके के सर्वर रूम से जुड़े रहेंगे जोकि एरिया में हो रही अनयूजुअल एक्टिविटी पर नजर रखे रहेंगे।

iot का भविष्य

iot टेक्नोलॉजी अब ग्रोथ करना स्टार्ट कर चुकी है और इसे इंप्लीमेंट करना भी काफी आसान है बस सभी डिवाइस और होम अप्लायंस में एक इलेक्ट्रॉनिक चिप तथा कुछ सेंसर लगेंगे जिसकी मदद से यह उपकरण चीजो को सेंस करके जानकारी को घर मैं मौजूद बाकी उपकरण से साझा करेंगे तथा उस सिचुएशन के हिसाब से एक्शन लेंगे।

वैसे अभी कई सारे उपकरणों में इस स्मार्ट टेक्नोलॉजी को इंप्लीमेंट करना चालू कर दिया गया है जैसे कि स्मार्ट रेफ्रिजरेटर या एयर कंडीशनर और यह कंप्रेसर में गैस की लीकेज या शॉर्टेज होने पर या फिर सर्विसिंग की रिक्वायरमेंट होने पर खुद ही कंपनी को खबर कर देते हैं और जिससे उस कंपनी के कस्टमर केयर से सर्विसिंग के लिए आपको कांटेक्ट किया जाता है।

इसके लिए बस आपको इन उपकरणों को अपने घर के वाईफाई से कनेक्ट करना होता है और साथ ही अपने स्मार्टफोन से भी कनेक्ट करना रहता है, जिससे यह खुद ही प्रॉब्लम को डायग्नोज करके आपको बताते हैं और आप इन्हें अपने मोबाइल से कंट्रोल भी कर सकते है।

वही internet-of-things की वजह से घर की बाकी चीजों जैसे कि इनवर्टर, गीज़र, लाइट, फैन आदि पर भी आपका कंट्रोल रहेगा और यह सभी चीजें आपके एक इशारे या आवाज पर ही काम करेंगे। जिसकी वजह से हमारा फ्यूचर बहुत ही कमाल का होने वाला है और यह सारी चीजें किसी सुपर पावर से कम नहीं होगी। वही यह चीजें शायद आने वाले 10-12 सालों में एकदम कॉमन होंगी ।

किसी वेबसाइट को खोलने पर Cookie कंसेंट बैनर क्यों आते है?

वेबसाइट में Cookies Consent बैनर क्यों आते है?
वेबसाइट में Cookies Consent बैनर क्यों आते है?

आप जब भी किसी नई वेबसाइट पर विजिट करते हैं तो उसमें से बहुत सी वेबसाइट पर कुकी कंसेंट का पॉपअप आता है जिसमें एक्सेप्ट ऑल या फिर फंक्शन ओन्ली का ऑप्शन रहता है। और अगर हम इस नोटिफिकेशन को एलाऊ कर देते है तो वो वेबसाइट हमारे किस तरह के डाटा को एक्सेस करते हैं, तथा क्या इस तरीके के नोटिफिकेशन आना किसी वेबसाइट के ऑथेंटिकेट होने का साइन है तो आइये इसे जानते है।

वेबसाइट की कुकीज़ क्या होती है ?

कुकीज़ एक बहुत छोटा सा डाटा होता है जो कि हमारे कंप्यूटर या फिर मोबाइल आदि के वेब ब्राउज़र में किसी वेबसाइट के द्वारा स्टोर होती हैं। कुकीज़ हमारे द्वारा वेबसाइट में भरी जाने वाली जानकारी या फिर उस वेबसाइट में देखे जाने वाले पेज के साथ हमारे द्वारा उस पेज में बिताए जाने वाले समय आदि को उस वेबसाइट को बताती है।

वेबसाइट कुकीज़
वेबसाइट कुकीज़

इन जानकारी की मदद से वेबसाइट्स को आपकी पसंद या नापसंद का अंदाजा लग जाता तथा उसमे आपको वही चीजें पहले दिखती है जिसमें आपका इंटरेस्ट रहा हो।

वही इसके अलावा आपने किसी वेबसाइट जैसे कि फेसबुक टि्वटर आदि में लॉगिन किया है और आप उन वेबसाइट्स को उसी ब्राउजर में दोबारा खोलते हैं तो आपकी ब्राउज़र में सेव हुई कुकी की वजह से ही उनमें दोबारा लॉगिन नहीं करना पड़ता और जब तक आप लाग-आउट नहीं करते तब तक यह उस ब्राउज़र में आपकी आईडी लॉगइन रहती है ।

यानी कि कूकीज के ही द्वारा वेबसाइट अपने यूजर को पहचानते हैं और उसके यूजर बिहेवियर के साथ उसका डिवाइस टाइम, उसकी लैंग्वेज तथा कंट्री आदि की नॉलेज रखते हैं जिससे वह अपने यूजर को बेटर पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस और ऐड दे सके।

क्या वेबसाइट कुकीज़ ख़तरनाक है ?

वैसे यह cookie कोई वायरस या स्पाइवेयर नहीं है और इसे लेकर कई तरह के कानून है जो कि किसी भी वेबसाइट को कुकीज़ के इस्तेमाल के समय पालन करना होता है और इन्हीं कानून की वजह से कुकी कंसेंट का ऑप्शन आता है और कोई भी वेबसाइट अपने cookie के जरिये किस तरह का डाटा ले रही है उसे अपने प्राइवेसी पॉलिसी पेज में बताना होता है ।

वेबसाइट कुकीज़ कितने प्रकार की होती है ?

ब्राउज़र कुकीज़ पांच प्रकार की होती हैं:

  • सेशन कुकीज़
  • टेम्पररी कुकीज़
  • परमानेंट कुकीज़
  • फ़्लैश कुकीज़
  • ज़ॉम्बीज़ कुकीज़

कोई भी वेबसाइट, सेशन cookie जो कि temporary cookie होती है, और परमानेंट cookie जो कि लॉगइन डीटेल्स सेव करती है तथा थर्ड पार्टी कुकीज जो कि एडवर्टाइजमेंट के लिए यूज होती हैं का इस्तेमाल करती हैं।

इनके अलावा बाकी के 2 अन्य प्रकार की cookies malware की तरह होती हैं जो कि spamy वेबसाइट्स यूज करती हैं और यह जनरली पायरेटेड मूवीज, पाइरेटेड सॉफ्टवेयर या एडल्ट कंटेंट वेबसाइट्स यूज़ करती है, इसलिए इस तरह के spammy वेबसाइट को खोलने से बचना चाहिए ।

वेबसाइट के द्वारा कुकीज़ के इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन

बात करते है जेन्युइन वेबसाइट्स की तो हमारे यहाँ अभी गवर्मेंट वेबसाइट्स के लिए ही गाइडलाइन है लेकिन अगर कोई वेबसाइट आपके डेटा का गलत इस्तेमाल करता है तो आप उसकी कंप्लेन कर सकते है। लेकिन यूरोपियन यूनियन तथा अमेरिका के कैलिफोर्निया में अपने नागरिकों के प्राइवेसी का खास ख्याल रखा जाता है तथा उनकी प्राइवेसी को बनाये रखने के लिए अपने नागरिकों अधिकार दिए हैं, जिससे वो तय कर सके की कोई भी वेबसाइट या कंपनी उनके किस तरह के डाटा को स्टोर कर सकती है।

वहा के लोग चाहे तो अपने डाटा को देने से मना कर सकते हैं और वेबसाइट को non-personalized एक्सपीरियंस्ड के लिए बाध्य कर सकते हैं। अगर कोई वेबसाइट ऐसा ना करें तो उस पर वहां पर उसपे केस हो सकता है, भले ही वह किसी दूसरे देश की वेबसाइट ही क्यों ना हो तथा उसे 5 lakh यूरो यानी कि लगभग 4 करोड़ 44 लाख रुपए तक का हर्जाना यूज़र को देने होंगे।

वेबसाइटें GDPR तथा CCPA गाइडलाइन क्यों फॉलो करती है ?

किसी भी वेबसाइट इन देशो के द्वारा लगायी जाने वाली पेनल्टी से बचने के लिए यूरोपीय यूनियन के GDPR तथा कैलिफोर्निया के CCPA गाइडलाइन को फॉलो करना होता है तथा इन जगहों परवेबसाइट द्वारा यूजर्स को पर्सनलाइज्ड ऐड दिखाने या उनके ब्राउज़र में कुकी के इस्तेमाल करने के लिए उनकी की परमिशन लेनी होती है।

इस गाइडलाइन के अन्तर्गत वेबसाइट को अपने कुकी के द्वारा लिए जाने वाले डाटा की डिटेल देनी होती है और यह भी बताना होता है यह डाटा वह क्यों ले रहे हैं और इसका वह क्या इस्तेमाल करेंगे और क्या वह इसे किसी थर्ड पार्टी कंपनी को भी देंगे या नही।

"यूजर चाहे तो इसे एक्सेप्ट कर सकता या फिर इसे deny भी कर सकता जिसकी वजह से वेबसाइट उस ब्राउज़र में cookies का इस्तेमाल नहीं करेगी।"

वेबसाइट यूरोप तथा कैलिफोर्निया के यूजर के लिए cookie कंसेंट के पॉप-अप या बैनर के जरिये cookie के इस्तेमाल के लिए यूजर की परमिशन मांगती है, लेकिन वो इस चीज को सिर्फ यूरोपीय कंट्री या कैलिफोर्निया के लिए सेट नही कर सकते क्योंकि उन्हें यह नही पता होता कि उनके वेबसाइट का यूजर किस कंट्री से उनके पेज को खोलेगा।

इसलिए वो इस बैनर को वर्ल्ड वाइड इम्पलीमेंट करते है और जब हम इंडिया से भी किसी नई वेबसाइट को खोलते है तो हमे ये बैनर दिखाई देते है और हम भी अपने यूजर डेटा को देने से मना कर सकते है।

हाई रिज़ॉल्यूशन वीडियो रिकॉर्डिंग में हाई-स्पीड मेमोरी कार्ड की आवश्यकता क्यों होती है?

हाई रेजोल्यूशन रिकॉर्डिंग में वीडियो क्लियर नही आती?
हाई रेजोल्यूशन रिकॉर्डिंग में वीडियो क्लियर नही आती?

अक्सर आपने अपने दोस्तों को इस बात पर कभी न कभी खुश होते देखा होगा कि आपने जो 32GB की मेमोरी कार्ड ₹650 में खरीदी है, वह उन्हें उसी एक ही कंपनी की मेमोरी कार्ड महज ₹400 में ही मिल गई। लेकिन जब भी कभी वह उस मेमोरी कार्ड को लगाकर हाई resolution या 4K वीडियो शूट या प्ले करते हैं तो उस वीडियो की क्वालिटी सही नहीं रहती और उस वीडियो की एडिटिंग तथा प्रोसेसिंग में भी उन्हें टाइम लगता है।

तो आइये अब हम बात करते है Secure digital यानी कि SD card के बारे में और क्या इसकी वजह से आपके कैमरे की वीडियो क्वालिटी पर भी असर पड़ता है तो आइए इसे जानते हैं।

फ्लैश मेमोरी क्या है?

फ्लैश मेमोरी वो मेमोरी है जो डाटा को अपने अंदर स्टोर किये रहती है तथा इसके लिए इन्हे किसी पॉवर सोर्स की जरूरत नहीं होती है। तो जैसे लैपटॉप तथा कंप्यूटर में इंटरनल मेमोरी में हार्ड डिस्क ड्राइव तथा SSD होते हैं तथा उसमें पेनड्राइव को flash external मेमोरी की तरह इस्तेमाल करते हैं तो उसी तरह मोबाइल में भी emmc तथा ufs टाइप की इंटरनल मेमोरी होती है तथा इसमें माइक्रो SD कार्ड को एक्सटर्नल या फ्लैश मेमोरी की तरह इस्तेमाल करते हैं।

वैसे फ्लैश मेमोरी का एक फायदा यह है कि यह डाटा को बिना पावर सप्लाई के भी स्टोर किए रहती है तथा आप अपनी फोटो, वीडियो या फिर डॉक्यूमेंट को इस में रखकर कहीं छुपा भी सकते हैं।

माइक्रो SD मेमोरी कितने प्रकार की होती है?

आजकल यह मेमोरी कार्ड अपने स्टोरेज के हिसाब से चार प्रकार की आती है, जिसमें पहला सिक्योर डिजिटल SD मेमोरी है तथा दूसरा हाई क्वालिटी यानी SDHC मेमोरी है जिनकी कैपेसिटी अधिकतम 32GB तक की होती है। तीसरा extended कैपेसिटी यानी कि SDXC मेमोरी कार्ड होता है तथा चौथा अल्ट्रा कैपेसिटी यानी कि SDUC होता है इन दोनों की कैपेसिटी 32GB से शुरू होती है।

SD card marking
SD card marking. image source: sandisk

बात करते हैं मेमोरी कार्ड की क्वालिटी की तो मेमोरी कार्ड तीन प्रकार से classified किए गए हैं जो कि अपने डाटा ट्रांसफर के स्पीड के हिसाब से उसमें इस्तेमाल होने वाली technology के according है, और ये तीन प्रकार speed class, UHS speed class और video speed class है।

स्पीड क्लास (SC)

माइक्रो मेमोरी में सबसे पुराना है है स्पीड क्लास, जो की मेमोरी कार्ड में C letter के अंदर 2, 4 ,6 या 10 लिखकर आता है और ये सिर्फ standard वीडियो क्वालिटी को ही सपोर्ट करता है। इनमें क्लास 8 टाइप कार्ड HD वीडियो को सपोर्ट करता है तथा क्लास 10 फुल एचडी वीडियो के रिकॉर्डिंग या प्लेबैक को सपोर्ट करता है।

UHS मेमोरी कार्ड

SD क्लास से better टाइप का मेमोरी कार्ड है अल्ट्रा हाई स्पीड यानी कि UHS स्पीड क्लास और इसकी पहचान यह है कि U के अंदर 1 या 3 लिखकर आता है जिसमें U1 टाइप मेमोरी फुल HD वीडियो के लिए तथा U3 टाइप 4k वीडियो के लिए compatible होता है।

वीडियो स्पीड क्लास

वीडियो स्पीड क्लास एक नए टाइप का क्लास है, जो कि UHS मेमोरी version 5.0 के ऊपर ही रेटिंग किया गया है तथा इसका मार्क मेमोरी कार्ड मे V6, V10, V30, V60 तथा V90 लिखकर आता है। इसमें V6 HD क्वालिटी ,V10 फुल HD क्वालिटी, V30 4K तथा V60 और V90, 8K वीडियो के रिकॉर्डिंग के लिए compatible है।

speed of the memory card
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अब मेमोरी कार्ड के स्पीड की बात करते हैं तो क्लास 2, 4, 6 की अधिकतम स्पीड 12.5 mb/sec की होती है, जबकि क्लास 10 मेमोरी की अधिकतम स्पीड 25 mb/sec तथा UHS-I मेमोरी की maximum स्पीड 104 mb/sec और UHS-II की मैक्सिमम स्पीड 312 mb/sec है। UHS-3, video speed class के हिसाब से ही characterized है, जिसमे SDUC card भी आते है जिनकी अधिकतम स्पीड 985 mb/sec है।

मेमोरी कार्ड का वीडियो क्वालिटी से क्या लेना देना है ?

हम इसे ऐसे समझते हैं कि रिकॉर्डिंग के लिए हम जब कैमरा ऑन करते हैं तो डिवाइस रेजोल्यूशन के हिसाब से डाटा को स्ट्रीम करता है तथा उसे मेमोरी कार्ड में write करता है। तो जैसे कि हम फुल एचडी वीडियो को रिकॉर्ड करते है तो वह 30 FPS पे 10 mb/sec की स्पीड से डाटा को write करेगा जोकि क्लास 6 या 8 तक के मेमोरी कार्ड हैंडल कर ले जाएंगे।

video speed class
image: sdcard.org

लेकिन अगर हम कैमरे का मेगापिक्सल या फ्रेम को बढ़ा देते हैं, तो यह स्पीड रेट 30 mb/सेकंड की हो जाएगी जो कि ये कार्ड बिल्कुल भी इसे हैंडल करने लायक नहीं है। और इन कार्ड में जो वीडियो रिकॉर्ड होकर सेव होगी वह lag करेगी तथा उसमे ब्लैक स्पॉट आएंगे और उसकी क्वालिटी भी खराब हो जाएगी।

इसी तरह 4K वीडियो रिकॉर्ड करने पर कैमरा लगभग 50 mb/ सेकंड की स्पीड से डाटा को स्ट्रीम करेगा जिसके लिए UHS -1 से नीचे के मेमोरी sufficient नहीं है और यही बात वीडियो प्लेबैक के लिए भी है। वैसे इन सब के अलावा मेमोरी कार्ड में एप्लीकेशन performance class A1 और A2 भी लिखा रहता है, जोकि बताता है की मेमोरी कार्ड कितने इनपुट/आउटपुट ऑपरेशन एक बार में करने की कैपेसिटी रखता है।

इन्हीं स्पेसिफिकेशन की वजह से मेमोरी कार्ड की कीमत तय होती है तथा ज्यादा फ़ास्ट स्पीड के कारण क्लास 10 की तुलना में UHS और वीडियो क्लास वाले मेमोरी की कीमत ज्यादा होती है। वैसे जहां पर आजकल मोबाइल के कैमरे की क्वालिटी अच्छी होती जा रही है तो हमें ऐसे में हाई स्पीड मेमोरी कार्ड की आवश्यकता ही पड़ती है।

इन सबके अलावा UFS मेमोरी कार्ड भी मार्केट में आ गए हैं लेकिन अभी स्मार्टफोन में इनकी compatibility नहीं है और फिलहाल सैमसंग के नोटबुक में ही इन्हें लगा सकते हैं।

क्या चार्जर वास्तव में मोबाइल को चार्ज ना करने पर भी बिजली की खपत करता है?

पूरे महीने चार्जर का स्विच ऑन रखने पर कितना बिल आएगा ?
पूरे महीने चार्जर का स्विच ऑन रखने पर कितना बिल आएगा ?

हम अक्सर यह सुनते आए होंगे कि चार्जर का इस्तेमाल ना होने पर हमेशा उसके स्विच को ऑफ कर दें और बिजली बचाएं लेकिन आपको पता है कि अगर चार्जर मोबाइल से कनेक्ट नहीं है और फिर भी उसकी सप्लाई ऑन है, तो वह महीने भर में कितनी बिजली की खपत करेगा?

तो आइये बात करते है की चार्जर स्टैंडबाई होने पर बिजली की कितनी खपत करेगा और उसका हमारी जेब पर कितना असर पड़ेगा? लेकिन उससे पहले ये जानते है की चार्जर काम कैसे करता है।

चार्जर काम कैसे करता है?

एक मोबाइल चार्जर हमारे घर की 220 वोल्ट की एसी सप्लाई को जनरली डेढ़ से 10 वोल्ट तक कम करके उसे डीसी वोल्टेज में कन्वर्ट करता है जिससे हमारे मोबाइल की बैटरी चार्ज होती है। सामान्यतः एक मोबाइल चार्जर में 4 मेन कंपोनेंट होते है जोकि इस प्रकार है :

  • स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर
  • रेक्टिफायर
  • फिल्टर
  • बैटरी चार्जर कंट्रोलर चिप

जिसमें स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर करंट को हाई वोल्टेज लो वोल्टेज में लाता है तथा डायोड ब्रिज रेक्टिफायर सर्किट एसी करंट को डीसी करंट में कन्वर्ट करता है क्योंकि बैटरी हमेशा डीसी करंट से से ही चार्ज होती है।

वहीं तीसरा कंपोनेंट फिल्टर होता है जिसमें एक कैपेसिटर होता है जोकि वोल्टेज रेगुलेटर का काम करता है तथा सबसे आखरी में आता है बैटरी चार्ज कंट्रोलर चिप जो कि मोबाइल की बैटरी के Soc तथा Soh को मॉनिटर करके बैटरी के फुल चार्ज होने पर चार्जिंग को बंद कर देता है |

क्या चार्जर जब मोबाइल चार्जिंग पर नहीं होता तो भी पॉवर की खपत करते है?

तो अब बात आती है कि क्या चार्जर जब मोबाइल की बैटरी चार्ज नहीं करते तो भी पॉवर की खपत करते है तो है तो इसका जवाब है 'हाँ' क्योंकि चार्जर में इस्तेमाल होने वाला ट्रांसफार्मर नो लोड पर भी अपने कोर को मैग्नेटाइज करता है किसके लिए है थोड़ी मात्रा में पावर को कंज्यूम करता है और और इसे ही आयरन लॉस कहते हैं।

यह मैग्नेटाइजिंग कर्रेंट बहुत कम मात्रा में होती है तथा मोबाइल से कनेक्ट ना होने या नो-लोड की की सिचुएशन में बहोत ही कम मात्रा में पावर की खपत होती है। यह पावर चार्जर के रेटेड आउटपुट पावर का महज़ 0.7% से 2% के बीच में ही होता है, जोकि आपके चार्जर की क़्वालिटी पे डिपेंड करता है।

वैसे आपका चार्जर ब्रांडेड है और मोबाइल के साथ ही आया है, तो उसमें 0.7% से ज्यादा लॉस नहीं होगा और यह बैटरी चार्जर कंट्रोलर के साथ ही आएगा जो कि आप की मोबाइल की बैटरी फुल होने पर उसे चार्जर से डिस्कनेक्ट कर देगा।

चार्जर द्वारा नो लोड पर बिजली की ख़पत

हम बात करते हैं कि यह 0.7% होता कितना है, तो हम मार्केट में आजकल आने वाले 15 वाट तथा 30 वाट चार्जर को लेते हैं, तो 15 वाट चार्जर मोबाइल से कनेक्ट ना होने पर 0.1 वाट तथा 30 वाट का चार्जर नो लोड पर 0.21 वाट बिजली की खपत करता है।

वही बात आती है कि यह महीने भर में कितना होगा तो एक 15 वाट का चार्जर बिना चार्जिंग के लगातार महीने भर ऑन रहने पर लगभग 73 वाट बिजली की खपत करेगा तथा ऐसी ही सिचुएशन में पर 32 वाट का चार्जर महीने भर में लगभग 152 वाट बिजली की खपत करेगा।

चार्जर का स्विच हमेसा ऑन रहने पर कितना बिल आएगा?

अगर हम साल भर तक चार्जर का प्लग ऑन किये रहे तो यह 15 वाट के चार्जर में 0.87 unit यानी कि 1 यूनिट से भी कम रहेगा। इंडिया में 1 यूनिट की क़ीमत ₹3 से ₹7 के बीच में varry करती है तो इसी हिसाब से रुपए आपको 1 साल में देने होंगे जोकि एक महीने में कुछ पैसे ही होंगे जोकि हमारे monthly bill के हिसाब से तो negligible है।

वैसे एक 15 वाट का चार्जर रोज 3 घण्टे आपका मोबाइल चार्ज करेगा तो उसकी monthly cost लगभग 1.35 unit होगी और इतनी ही cost लगातार 1.5 साल तक नो लोड पे चार्जर को ऑन रखने पर आएगी।

आपके अकेले के लिए यह कॉस्ट कोई मायने नहीं रखता, लेकिन फिर भी गवर्नमेंट चार्जर के यूज ना होने पर उसे बंद करने को क्यों कहती है क्योंकि अगर पूरा देश ऐसी ही इस्तेमाल ना होने पर भी चार्जर को ऑन करके रखेगा तो महीने भर में यह 2000 मेगा वाट बराबर बिजली होगी, जो कि लगभग 150 घरों के बिजली के लिए पर्याप्त है।

क्या सैटेलाइट इंटरनेट भविष्य में मोबाइल टावरों की अनिवार्यता को खत्म कर देगा?

क्या आपके एरिया में ब्रॉडबैंड नही है और मोबाइल में नेट भी स्लो चलता है?
क्या आपके एरिया में ब्रॉडबैंड नही है और मोबाइल में नेट भी स्लो चलता है?

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो 4G इस्तेमाल करने के बावजूद ख़राब नेटवर्क कनेक्टिविटी की वजह से बहुत ही स्लो इंटरनेट स्पीड से काम चला रहे हैं तो मैं आपको एक ऐसे ऑप्शन के बारे में बता रहा हूं जो जल्द ही पूरे दुनिया के हर एक कोने में हाई स्पीड इंटरनेट की पहुंच बढ़ा देगा।

मै बात कर रहा हूँ सैटेलाइट इंटरनेट की, जो कि अभी भी बहुत से लोग इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन अब इसमें बहुत बड़ा अपडेट होने वाला है, जिससे इसकी कवरेज धरती के हर एक एरिया में होने के साथ ही इसकी इंटरनेट स्पीड भी बढ़ने वाली है।

वैसे अगर आपको लगता है इसमें क्या खास है मोबाइल टॉवर भी तो सेटेलाइट से ही तो कनेक्टेड होते है तो उसके लिए अलग से एंटीना घर पे क्यों लगवाएं, तो आइये सबसे पहले मोबाइल टावर एकदूसरे से किस तरह कनेक्ट होते है उसे जान लेते है।

क्या मोबाइल टॉवर सीधे सैटेलाइट से कनेक्टेड होते हैं ?

अगर आपको लगता है कि मोबाइल टॉवर सेटेलाइट से ही तो कनेक्टेड होते हैं तो यह गलत है, हर एक मोबाइल टावर का BTS यानी Base Tower Station, टावर में लगे हुए गोल छतरी जिसे माइक्रोवेव कहते हैं उसके द्वारा BSC (Base Station Controller) से जुड़े होते है और यह सारे BSC जिले के MSC (मोबाइल स्विचिंग सेंटर) से जुड़े होते हैं जो कि आपके मोबाइल के कॉल और डाटा को कंट्रोल करता है और यह सारा सिग्नल माइक्रोवेव antenna के द्वारा ही ट्रांसफर होता है।

वही इंटरनेशनल नेटवर्क कनेक्टिविटी की बात करें तो सारे MSC, इंटरनेशनल स्विचिंग सेंटर से कनेक्ट रहते हैं तथा यह स्टेशन Fiber optic cables, माइक्रोवेव या सैटेलाइट के जरिए कनेक्ट होते हैं और इन्हीं फाइबर ऑप्टिक केबल से ब्रॉडबैंड भी जुड़े होते हैं। इन्हीं फाइबर ऑप्टिक केबल से ब्रॉडबैंड भी जुड़े होते हैं। वैसे इन्हीं फाइबर ऑप्टिक केबल से ब्रॉडबैंड भी जुड़े होते हैं।

सैटेलाइट इंटरनेट

ऐसे में जहां पर ब्रॉडबैंड available नहीं है और मोबाइल का सिग्नल भी low रहता है तो ऐसी स्थिति में अब जल्द ही हमारे पास एक और विकल्प मौजूद होगा और वह है सैटेलाइट इंटरनेट, जिसमें आपको एक डिश एंटीना की तरह ही एक रिसीवर लेना होगा जो कि सीधे सेटेलाइट से कनेक्ट होगा जिसे आप wireless router से कनेक्ट करके वाईफाई जैसे इस्तेमाल कर सकते हैं।

अभी फिलहाल Bharti Airtel और Hughes India तथा Viasat कंपनियां सैटेलाइट इंटरनेट की सुविधा दे रही है। लेकिन अभी इनकी रेंज तथा इंटरनेट स्पीड इतनी अच्छी नहीं है और साथ ही यह काफी महंगे भी है।

हम बात कर रहे हैं Alon musk की कंपनी Space X की जो कि अपने मार्श प्रोजेक्ट के लिए funding जुटाने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट के फील्ड में कूद गए हैं और यह Starlink के नाम से 4445 सैटेलाइट को लांच करने की शुरुआत कर चुके हैं वहीं इनके अलावा सैमसंग और अमेजॉन ने भी लगभग इतनी ही संख्या में सैटेलाइट को लांच करने का प्लान बनाया है।

सैटेलाइट्स अंतरिक्ष से इंटरनेट कैसे मुहैया कराएंगी ?

तो जहां नॉर्मल Geo Synchronous सैटेलाइट धरती से 3600 km की ऊंचाई पर स्थित होती है, वही Starlink इन सैटेलाइट को धरती की lower earth आर्बिट यानी कि Leo ऑर्बिट में महज 550km की ऊंचाई पर रखेगा जिससे इसकी सिग्नल की strength अच्छी होगी और वहीं से सेटेलाइट के सिग्नल में मौसम के इंटरफ़ेस को कम करने के लिए यह एक दूसरे से लेजर के द्वारा कम्युनिकेट करेगी।

यह इन सैटेलाइट को Reusable राकेट के साथ भेजा जा रहा है जो कि अपनी कक्षा में जाने पर एक जगह स्थित हो जाएगी तथा धरती की स्पीड के साथ match करके उसी स्पीड में घूमेगी और उस particular एरिया को कवर करेगी। अब इतने सारे सेटेलाइट्स होने की वजह से यह धरती के हर भाग को कवर करेगी और ocean से लेकर पहाड़ो तक सभी जगह इनकी कनेक्टिविटी मौजूद होगी।

वैसे सिक्योरिटी कारण की वजह से कई देश सैटेलाइट फोन की तरह सैटेलाइट इंटरनेट को भी मंजूरी नहीं देते लेकिन Space X ने इसमें मंजूरी के लिए भारत में अप्लाई किया है तथा अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो हम भी इसका इस्तेमाल जल्द ही कर पाएंगे और शायद इसके प्लान भी जिओ की तरह सस्ते हो।

एक उपग्रह अंतरिक्ष से कितनी स्पष्ट छवि ले सकता है?

क्या सैटेलाइट अन्तरिक्ष से हमारी कलाई में बंधी घड़ी का टाइम देख सकते है ?
क्या सैटेलाइट अन्तरिक्ष से हमारी कलाई में बंधी घड़ी का टाइम देख सकते है ?

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क्या आपको पता है हमारे पृथ्वी की ऑर्बिट में अभी लगभग 2700 वर्किंग सेटेलाइट है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है, वही जब हम रात में तारों को चलते देखते हैं, तो वह स्वर्ग में जाती आत्मा नहीं बल्कि यही सेटेलाइट्स है जो हम पर हमेशा ऊपर से नजर रखे हुए हैं।

वैसे अगर वह चलता हुआ तारा ब्लिंक कर रहा है तो वह एक प्लेन है क्योंकि सेटेलाइट में खुद की लाइट नहीं होती है और यह सूरज की रिफ्लेक्शन से चमकती है तथा सोलर पैनल से उर्जा लेती है। हम इस आर्टिकल में बात कर रहे अर्थ ऑब्जर्विंग सैटेलाइट के इमेज कैपचरिंग पावर्स की और यह सैटेलाइट ऊपर से धरती पर किसी भी चीज की कितनी क्लियर इमेज ले सकती है?

अर्थ ऑब्जर्विंग सैटेलाइट क्या है ?

वैसे तो आमतौर पर लगभग 14 तरह की सेटेलाइट होती हैं जैसे कि एस्टॉनोमिकल, नेविगेशनल या वेदर सेटेलाइट लेकिन हम बात कर रहे हैं अर्थ ऑब्जर्विंग सेटेलाइट की जिसे हम रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट भी कहते हैं, जो कि हमारी धरती से लगभग 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह अंतरिक्ष से हमारी धरती की इमेज ले सकती हैं तथा अभी पिछले साल तक इनकी संख्या लगभग 446 थी।

इन अर्थ ऑब्जर्विंग सैटेलाइट से ली गयी तस्वीरों की मदद से कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन, ग्रामीण विकास, खनिज पूर्वेक्षण, पर्यावरण, वानिकी, महासागर संसाधन और आपदा प्रबंधन को कवर करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जाते है। इसकी ही मदद से गूगल मैप आदि में दिखने वाली धरती पे मौजूद चीजों की तस्वीर ली जाती है।

अब सवाल यह है कि यह सेटेलाइट ऊपर से कितनी क्लियर इमेज ले सकती हैं, तो आइए सबसे पहले यह वीडियो देखते है।

तो किसी इमेज की clearity उसके रेजोल्यूशन से होती है और सेटेलाइट में यह resolution पांच प्रकार की होती है जोकि स्पाटिअल, स्पेक्ट्रल, टेम्पोरल, रेडियोमैट्रिक और ज्योमैट्रिक रेजोल्यूशन है। तो सबसे पहले बात करते हैं ये पाँचो रेजोल्यूशन है क्या।

स्पाटिअल रेजोल्यूशन

यह सेटेलाइट इमेज में एक पिक्सेल के एक साइड के लंबाई को बताता हो यानी कि इमेज का एक पिक्सेल कितने बड़े एरिया को कवर करता है और यह जितना कम होगा इमेज उतनी ही क्लियर होगी। जैसे कि अगर किसी इमेज का स्पाटिअल रेजोल्यूशन 30 मीटर हो तो वह उसका हर एक पिक्सेल 30 मीटर तक के एरिया को रिप्रेजेंट करेगा।

तो इसी तरह 10 मीटर spatial वाली इमेज 10 मीटर एरिया को रिप्रेजेंट करेगी तथा 30 मीटर स्पाटिअल रेजोल्यूशन वाली इमेज से 3 गुना ज्यादा क्लियर होगी।

स्पेक्ट्रल रेजोल्यूशन

स्पेक्ट्रल रेजोल्यूशन इमेज की wavelength इंटरवल साइज को प्रदर्शित करती है और यह स्पेक्ट्रल रेजोल्यूशन जितनी ज्यादा होगी इमेज उतनी ही कलरफुल होगी। स्पेक्ट्रल रेजोल्यूशन में कुल कितने बैंड मैजूद है उसी के हिसाब से इमेज में कलर होते है। जैसे की 1 बैंड के स्पेक्ट्रम में सिर्फ ब्लैक एंड वाइट कलर तथा 3 बैंड वाले स्पेक्ट्रम में RGB कलर मैजूद होंगे। आज के सॅटॅलाइट 14 बैंड के साथ इमेज ले सकते है।

टेंपोरल रेजोल्यूशन

टेंपोरल रेजोल्यूशन बताता है कि किसी भी जगह की पिक्चर कोई सैटेलाइट कितने टाइम के अंतराल में ले रही है, यानी कि सेटेलाइट किसी भी जगह की इमेज को कुछ दिनों के अंतराल में बार-बार लेकर के उन सभी इमेजेस को जोड़ करके एक क्लियर इमेज बनाती है।

रेडियोमेट्रिक रेजोल्यूशन

रेडियोमेट्रिक रेजोल्यूशन विभिन्न ग्रे-स्केल वैल्यू में अंतर करने की सेंसर की क्षमता को कहते है। यह बिट में मापा जाता है तथा यह सेटेलाइट के सिस्टम की कई लेवल के ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को रिकॉर्ड करने की क्षमता को बताता है। इसकी मदद से भूमि सतहों पर रिफ्लेक्शन में अधिक अंतर देखा जा सकता है।

जियोमेट्रिक रेजोल्यूशन

जियोमेट्रिक रेजोल्यूशन धरती के किसी भी भाग को इमेज के सिंगल पिक्सेल में कितने इफेक्टिव तरीके से दर्शाया जा सकता है, जिसे GSD भी कहते हैं।

कोई भी earth observing सैटेलाइट इन पांचो रेजोल्यूशन की मदद से धरती के किसी भी भाग की क्लियर इमेज लेता है।

क्या सैटेलाइट अंतरिक्ष से हमारे हाथ में बंधी घड़ी का समय भी देख सकते हैं ?

यह जानने के लिए की सैटेलाइट कितनी छोटी चीज की क्लियर इमेज ले सकते है तो सबसे पहले बात करते हैं सेटेलाइट की spatial रेजोल्यूशन की तो यह अब तक Geoeye-1 setellight में सबसे ज्यादा है जो कि लगभग 40 सेंटीमीटर की स्पेशियल रेसोल्यूशनके साथ आता है। वही सैटेलाइट टेंपोरल रेजोल्यूशन की मदद से किसी जगह की एक समय के अंतराल में इमेज लेकर 5 या 6 सेंटीमीटर की ग्राउंड रेजोल्यूशन तक की इमेज ले सकता है।

तो अब बात आती है की यह अंतराल कितना होता है तो यह अंतराल कई दिनों का होता है जब तक कि वह सेटेलाइट अपनी ऑर्बिट में धरती का दुबारा चक्कर नहीं लगा लेता।

तो अब बात करते हौ की हम 6 सेंटीमीटर के रेजोल्यूशन में आप क्या देख सकते हो ?

इस रेजोल्यूशन में आप बिल्डिंग ,प्लांट और घर के सामने खड़ी कार से लेकर किसी आदमी के जूते तक देख सकते हैं। लेकिन उसका स्पेक्ट्रल, रेडियोमेट्रिक या जियोमेट्रिक रेजोल्यूशन इतना कम होता है कि गाड़ी का तो हल्का अंदाजा लगा सकते हैं, लेकिन उसका मॉडल कौन सा है यह नहीं समझ समझ में आता और हमारे जूते की तो बहुत धुंधली इमेज ही आती है।

तो इस हिसाब से सैटेलाइट इमेज में आपने अपने हाथ में घड़ी पहनी है या नहीं यह देखना ही अभी मुमकिन नहीं है, तो उसमें कितना टाइम हो रहा है यह सेटेलाइट से बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा, हाँ फ्यूचर में नई तकनीक की मदद से ये जरूर मुमकिन हो सकता है।

वैसे आपने अपने बगीचे या छत्त पे भांग की खेती कभी की हो तो sattelight की पुरानी फ़ोटो की मदद से पोलिस आपको जरूर अरेस्ट कर सकती है क्योंकि ये इमेज कई सालो तक स्टोर रहती है।

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